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माघ पूर्णिमा पर संगम स्नान के साथ पूरा होगा कल्पवास, जानिए परायण के नियम

कल्पवास करने से एक कल्प तपस्या का फल प्राप्त होता है, इस कल्पवास से लोगों का इहलोक ही नहीं, परलोक भी सुधर जाता है। वहीं पर माघ पूर्णिमा के साथ कल्पवास का परायण हो जाता है।

  • Written By: दीपिका पाल
Updated On: Feb 11, 2025 | 07:04 AM

महाकुंभ में कल्पवास परायण के नियम (सौ.सोशल मीडिया)

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Magh Purnima 2025: प्रयागराज में इन दिनों सबसे बड़े धार्मिक आयोजन महाकुंभ का दौर चल रहा है वहीं पर आने वाले 12 फरवरी को माघ पूर्णिमा है इस मौके पर स्नान का पुण्य फल पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धधालु पहुंचेंगे। महाकुंभ से एक महीने के कल्पवास की शुरुआत भी हो जाती है।

कहते हैं कि, कल्पवास करने से एक कल्प तपस्या का फल प्राप्त होता है, इस कल्पवास से लोगों का इहलोक ही नहीं, परलोक भी सुधर जाता है। वहीं पर माघ पूर्णिमा के साथ कल्पवास का परायण हो जाता है। कहते हैं कि, संगम स्नान के बाद यह परायण कर सकते है।

कल्पवास का श्रीमद् भागवत में मिलता है उल्लेख

आपको बताते चलें कि, महाकुंभ में चल रहे श्रीमद् भागवत  और पद्मपुराण में संगम की रेती पर हो रहे कल्पवास के प्रसंग का उल्लेख मिल रहा है। यहां पर महाकुंभ के दौरान चल रहे सभी कल्पवासी पहले पवित्र संगम में स्नान करेंगे और पूजन, दान पुण्य के बाद अपने घरों को लौट जाएंगे। यहां पर पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि, पौष पूर्णिमा में माघ पूर्णिमा की शुरुआत के बाद कल्पवास का व्रत परायण माघ पूर्णिमा के साथ होता है। यह तिथि पौष महीने की एकादशी से माघ महीने की द्वादशी तिथि से होती है।

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क्या होता है कल्पवास पर व्रत का परायण

यहां पर माघ पूर्णिमा पर बहुसंख्यक कल्पवासी अपने कल्पवास का परायण करने वाला है। यहां पर बताया जा रहा है कि, कल्पवास के लिए पद्म पुराण में भगवान दत्तात्रेय द्वारा कुछ नियमों की जानकारी दी गई है। यहां पर पौष पूर्णिमा के साथ कल्पवास के नियम शुरु होते है वहीं पर एक महीने के बाद अपने कल्पवास व्रत का पारण भी करते हैं। यहां पर कल्पवास का परायण करने के दौरान कल्पवासी माघ पूर्णिमा के दिन व्रत रखते हैं और संगम स्नान कर अपनी कुटिया में आकर भगवान सत्यनारायण की कथा सुनते हैं। इसके साथ ही कल्पवास का परायण हो जाता है।

कल्पवास करने के बाद निभाते हैं ये परंपरा

आपको बताते चलें कि, यहां पर माघी पूर्णिमा के दिन पूजन और हवन करने के साथ ही एक महीने के कल्पवास का संकल्प पूरा हो जाता है। यहां पर कल्पवास के दौरान सभी शामिल कल्पवासी अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार, तीर्थपुरोहितों को दान दक्षिणा का नियम अपनाया जाता है।

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यहां पर कल्पवास के दौरान कल्पवासी ने जो भी जौ बोए होते है उसे गंगा नदी में विसर्जित किया जाता है। यहां पर तुलसी वृक्ष को लेकर कल्पवास के समापन के बाद घर वापस लौटते है। यहां पर एक और परंपरा निभाई जाती है जहां पर कल्पवास से घर लौटने के बाद अपने गांव में भोज-भात का भी आयोजन करते हैं। इस तरह से महाकुंभ के कुछ दिन बच जाते है।

Kalpavas will be completed with the bath in sangam on magh purnima

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Published On: Feb 11, 2025 | 06:56 AM

Topics:  

  • Magha Purnima
  • Mahakumbh 2025

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