सुयोग्य वर और अखंड सौभाग्य प्राप्ति के लिये आज रखा जायेगा ‘जया पार्वती व्रत’, जानें पूजा विधि
हिंदू धर्म में 'जया पार्वती व्रत' की विशेष महिमा है। इस व्रत को 'गौरी व्रत' भी कहा जाता है। माता पार्वती को समर्पित यह व्रत विशेष रूप से अविवाहित महिलाओं द्वारा मनचाहा वर पाने के लिए रखा जाता है। इस व्रत को करने से विवाह में आ रही अड़चनें भी दूर होती हैं।
- Written By: रीना पंवार
(सौजन्य सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क : सनातन धर्म में ‘जया पार्वती व्रत’ का खास महत्व है। यह व्रत हर साल आषाढ़ महीने की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है। जया पार्वती व्रत को ‘गौरी व्रत’ के नाम से भी जाना जाता है। माता पार्वती को समर्पित ‘जया पार्वती व्रत’ (Jaya Parvati Vrat 2024) आज 19 जुलाई, शुक्रवार को रखा जाएगा। इस व्रत को विशेष रूप से अविवाहित महिलाएं मनचाहा वर प्राप्त करने के लिये करती हैं। यह व्रत कहीं एक दिन और कहीं पांच दिन तक मनाया जाता है।
जो महिलाएं इस व्रत को 5 दिन तक मनाती हैं वे इस दौरान लगातार पांच दिनों तक उपवास करती हैं और देवी पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। यह व्रत शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से शुरू होता है और पांच दिनों के बाद पूर्णिमा के दिन समाप्त होता है।
व्रत के पीछे पौराणिक कथा
हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को पति के रूप में प्राप्त करने के लिये कड़ी तपस्या की थी। माता पार्वती कई दिनों तक अनेक पूजा-पाठ और व्रत किए। इस दौरान कड़ी परीक्षाओं से गुजरने के बाद मां पार्वती ने भगवान शिव को प्रसन्न किया और उन्हें पति के रूप में प्राप्त किया। इस व्रत को लेकर अन्य पौराणिक कथाएं भी प्रचलित हैं।
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व्रत का शुभ मुहूर्त-
मां पार्वती को समर्पित ‘जया पार्वती व्रत’ 19 जुलाई शुक्रवार यानी आज रखा जाएगा। यह व्रत आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से आरंभ होता है। यह व्रत त्रयोदशी तिथि यानी 18 जुलाई को रात 8 बजकर 44 मिनट से शुरू हो रहा है, जबकि इसका समापन शुक्रवार यानी 19 जुलाई की शाम 07 बजकर 41 मिनट पर होगा।
पूजा विधि –
इस दिन देवी पार्वती और भगवान शिव की पूजा का खास महत्व है।
व्रती को जया पार्वती व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिये।
इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
तत्पश्चात माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर एक चौकी पर स्थापित करें और गंगाजल छिड़कें।
मां पार्वती की पूजा शिव के बिना अधूरी मानी जाती है अत: भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर भी स्थापित करें।
पूजा के दौरान शिव-पार्वती को कुमकुम, अष्टगंध, ऋतु फल, फूल और अन्य चीजें चढ़ाएं।
मां को लाल चुनरी और सुहाग का सामान अर्पित करें।
मां पार्वती को खीर का भोग जरूर लगाएं। खीर मां को अति प्रिय है।
पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ वैदिक मंत्रों का जाप करें और फिर आरती करें।
इस दिन जरूरतमंदों को भोजन खिलाएं और दक्षिणा प्रदान करें।
‘जया पार्वती व्रत’की महिमा
हिन्दू धर्म में जया पार्वती व्रत की खास महिमा है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि माता पार्वती की आराधना करने से न केवल मनचाहा वर मिलता है बल्कि अखंड सौभाग्य और संतान प्राप्ति का वरदान भी मिलता है। इस व्रत को अविवाहित महिलाओं के साथ-साथ विवाहित महिलाएं भी करती हैं। इस व्रत को पूरे विधि-विधान से करने से पारिवारिक जीवन में खुशियां आती है। जया पार्वती व्रत रखने से ग्रह दोषों से भी मुक्ति मिलती है।
