जनवरी 2026 में दूसरा प्रदोष व्रत किस दिन? क्या है सबसे सही प्रदोष काल? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त
Pradosh Vrat Kab Hai: जनवरी 2026 में दूसरा प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा? जानिए प्रदोष काल का सबसे शुभ समय, पूजा का सही मुहूर्त और भगवान शिव की आराधना से जुड़े जरूरी नियम।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान शिव (सौ.सोशल मीडिया)
January 2026 Second Pradosh Vrat Date: देवों के देव महादेव की कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत सनातन धर्म में खास महत्व रखता है। प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस बार माघ महीने का प्रदोष व्रत बहुत ही शुभ बताया जा रहा है। क्योंकि यह नए साल की शुरुआत और मकर संक्रांति के ठीक बाद मनाया जा रहा है।
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में माघ मास का पहला प्रदोष व्रत 16 जनवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा। यह दिन माघ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि में पड़ता है, जिसमें प्रदोष काल शाम 5:47 बजे से 8:29 बजे तक रहेगा। इसी समय भगवान शिव का पूजा-अर्चना करना सबसे शुभ माना जाता है।
कब है माघ महीने पहला प्रदोष व्रत 2026
ज्योतिष गणना के अनुसार, पंचांग के अनुसार, इस वर्ष, माघ महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 जनवरी को रात 8 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन 16 जनवरी को रात 10 बजकर 21 मिनट पर होगा। ऐसे में पंचांग को देखते हुए माघ महीने का पहला प्रदोष व्रत दिन शुक्रवार 16 जनवरी को रखा जाएगा।
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कैसे करें प्रदोष व्रत की पूजा
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- दिन भर सात्विक रहें और शिव मंत्रों का मन ही मन जाप करें।
- शाम को सूर्यास्त से करीब 45 मिनट पहले दोबारा स्नान करें।
- इसके बाद भगवान शिव का गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
- उन्हें बिल्व पत्र, धतूरा, आक के फूल और भस्म अर्पित करें।
- प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और अंत में आरती करें।
- पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगें।
गुरु प्रदोष व्रत का क्या है धार्मिक महत्व
गुरु प्रदोष व्रत रखने से शिक्षा, ज्ञान और संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके अलावा जो लोग आर्थिक तंगी से परेशान हैं या जिनके करियर में रुकावटें आ रही हैं, उनके लिए यह व्रत बहुत मंगलकारी माना जाता है। यह भी कहा जाता है कि इस दिन शिव मंदिर में दीपदान करने से जीवन के सभी अंधकार दूर हो जाते हैं।
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प्रदोष व्रत रखते समय किन बातों का रखें ध्यान
- प्रदोष की पूजा हमेशा कुश के आसन पर बैठकर करें।
- पूजा के समय उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख रखें।
- इस दिन अन्न का सेवन वर्जित होता है, शाम की पूजा के बाद ही फलाहार करें।
