Jagannath Temple: रथ यात्रा के बाद होती है ‘अधर पाना’ पूजा, जहां भगवान के सम्मान में फोड़ दिए जाते हैं घड़े
Lord Jagannath Rath Yatra: भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के समापन से पहले अधर पाना की रस्म में भगवान को विशेष मीठा पेय अर्पित किया जाता है और फिर मटके को फोड़ दिया जाता है।
- Written By: रीता राय सागर
जगन्नाथ रथ यात्रा (फोटो.सोशल मीडिया)
Adhar Pana Ritual Of Jagannath Temple: भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा 16 जुलाई को होने वाला है। इस रथ यात्रा के शुरु होने से लेकर समापन तक कई प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों का पालन किया जाता है।
इन्हीं में से एक है- अधर पाना, यह रथ यात्रा के अंतिम चरण के रस्मों में से एक है। यह अनुष्ठान तब होता है, जब भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान रहते हैं और श्री मंदिर में प्रवेश के एक दिन पहले किए जाते हैं।
क्या होता है अधर पाना?
अधर का अर्थ है होंठ और पाना का अर्थ है पेय। अधर पाना एक खास प्रकार का मीठा पेय होता है, इसे दूध, छेना, चीनी, केला, मसालों और सुगंधित सामग्री को मिलाकर तैयार किया जाता है। इस पेय को लंबे आकार के मिट्टी के घड़ों में भरकर तीनों रथों पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को अर्पित किया जाता है, लेकिन इस प्रसाद को प्रभु जगन्नाथ के भक्तों के बीच नहीं बांटा जाता है।
सम्बंधित ख़बरें
Mangalsutra Black Beads: मंगलसूत्र के काले मोती केवल फैशन नहीं बल्कि इनमें छुपे हैं धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व
Mangala Gauri Vrat : सावन के इन 4 मंगलवार में छिपा है अखंड सौभाग्य का रहस्य! अभी नोट कर लें सभी तिथियां
रक्षाबंधन की सुबह भूलकर भी न करें ये चूक! ये 4 गुप्त उपाय खोल सकते हैं सुख-समृद्धि के द्वार
25 जुलाई से बदल जाएगा धार्मिक माहौल, शुरू हो रहा है चातुर्मास, जानिए क्यों थम जाते हैं शुभ और मांगलिक कार्य
जगन्नाथ रथ यात्रा (फोटो.सोशल मीडिया)
क्यों फोड़ दिए जाते हैं मिट्टी के घड़े?
अधर पाना अनुष्ठान में इस्तेमाल होने वाले मिट्टी के घड़े खास प्रकार के होते हैं, जो प्रभु के मुंह तक पहुंचते हैं। इस अनोखी परंपरा में प्रभु को भोग लगाने के बाद मिट्टी के घड़ों को तोड़ दिया जाता है। मान्यता है कि जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान अनेक अदृश्य देवता, गण, यक्ष, भूत-प्रेत और दिव्य शक्तियां भगवान के साथ रहते हैं और उनकी सेवा करते हैं। इन दिव्य शक्तियों के लिए ही अधर पाना अर्पित किया जाता है।
पूजा पूरी होने के बाद सेवादार रथ पर रखे मिट्टी के घड़ों को वहीं फोड़ देते हैं। ऐसा माना जाता है कि घड़ों से बहने वाला यह पेय उन अदृश्य शक्तियों की प्यास बुझाता है। इसके बाद वे भगवान से आशीर्वाद लेकर अपने-अपने स्थान पर लौट जाते हैं।
इससे पहले होता है सुना बेश
अधर पाना से पहले भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का ‘सुना बेश’ होता है। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को स्वर्ण आभूषणों से सजाया जाता है। यह भगवान की दिव्य ऐश्वर्य, समृद्धि और संपूर्ण सृष्टि के रचयिता के प्रतीक को दर्शाता है।
