बप्पा को क्या अर्पित करना चाहिए और क्या नहीं (सौ.सोशल मीडिया)
Ganesh Chaturthi 2025 : आगामी 27 अगस्त से गणेश उत्सव का महापर्व शुरू होने जा रहा है। आपको बता दें, पंचांग के मुताबिक, हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देशभर में बहुत ही धूमधाम मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी का उत्सव 10 दिनों तक चलने वाला है।
अगर धार्मिक मान्यता की बात करें तो गणेश चतुर्थी में भगवान गणपति बप्पा की विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना की जाती है और घर में उनकी प्रतिमा स्थापित की जाती है और उनके प्रिय वस्तुओं को अर्पित भी किया जाता है।
कई बार कई लोग भूल जाते हैं कि गणेश उत्सव में गणेश जी को क्या अर्पित करें और क्या ना अर्पित करें। ऐसे में आइए आज जानते हैं कि गणेश उत्सव में बप्पा को क्या अर्पित करना चाहिए और क्या नहीं अर्पित करना चाहिए।
ज्योतिष- शास्त्रों के अनुसार, वैसे तो भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी चढ़ाना जरूरी माना जाता है। हिन्दू धर्म में भी तुलसी का एक विशेष महत्व है। लेकिन गणपति बप्पा की पूजा में तुलसी चढ़ाना वर्जित माना जाता है।
ऐसी मान्यता है कि गणेश भगवान ने तुलसी से विवाह का प्रस्ताव ठुकरा दिया था जिसके बाद तुलसी ने गणेश जी को दो शादियों का श्राप दिया था। तब से गणेश जी की मूर्ति पर तुलसी नहीं चढ़ाया जाता है।
ऐसा भी माना जाता है कि चतुर्थी के दिन चंद्रमा नहीं देखना चाहिए। इस दिन चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर कलंक लगता है यानी उसके ऊपर किसी तरह का कोई इल्जाम लग सकता है जिससे उसका अपमान हो।
भगवान गणेश की पूजा में जिस प्रकार तुलसी चढ़ाना वर्जित माना जाता है। वैसे ही कभी भी टूटे अथवा सुख अक्षत को नहीं अर्पित करना चाहिए, क्योंकि अक्षत का अर्थ ही होता है। जिसकी कोई छती ना हुई हो यानी जो पूरा हो। पूजा पाठ में प्रयोग होने वाले साबुत चावल को अक्षत माना जाता है।
गणेश चतुर्थी के दौरान गणपत बप्पा की पूजा आराधना करते वक्त बात का ध्यान देना चाहिए कि उन्हें केतकी के फूल को नहीं अर्पित करना चाहिए। मान्यता के उसी प्रकार भगवान गणेश की पूजा आराधना करते समय इन फूलों को चढ़ाने की मनाही ही होती है।
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बता दें, इसके अलावा भगवान गणेश की पूजा में सफेद फूल, सफेद रंग के वस्त्र, सफेद जनेऊ, सफेद चंदन. इत्यादि नहीं अर्पित करना चाहिए।
आपको बता दें, ध्यान रहे जहां भी गणेश भगवान की प्रतिमा स्थापित की गई हो वहां अंधेरा नहीं होना चाहिए। साथ ही अंधेरे में गणेश जी की मूर्ति को स्पर्श ना करें।