Narada Muni: आज है नारद जयंती, जानिए किसने और क्यों दिया था नारद मुनि को बड़ा श्राप
Narada Muni Story: नारद जयंती के पावन अवसर पर जानिए देवर्षि नारद मुनि से जुड़ी वह रोचक कथा, जब उन्हें एक बड़े श्राप का सामना करना पड़ा। किसने दिया यह श्राप और इसके पीछे क्या कारण था।
- Written By: सीमा कुमारी
देवर्षि नारद जी (सौ.Gemini)
Narada Muni Katha : आज 2 मई को देवर्षि नारद जी जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। धर्म ग्रथों के अनुसार, यह जयंती सृष्टि रचयिता ब्रह्मा जी के मानस पुत्र देवर्षि नारद के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में मनाई जाती है।
देवर्षि नारद जी को भगवान विष्णु के परम भक्त, देवताओं के संदेशवाहक और प्रथम पत्रकार के रूप में उनके ज्ञान, भक्ति और लोक-कल्याणकारी कार्यों का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है, जो सत्य व संचार का प्रतीक है।
क्यों कहा जाता है नारद मुनि को ब्रह्मा का मानस पुत्र?
पौराणिक कथा के अनुसार, नारद मुनि को ब्रह्मा का मानस पुत्र इस वजह से कहा जाता है, क्योंकि उनका जन्म मन, संकल्प और तप से माना जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मानस का अर्थ मन से उत्पन्न हुआ होता है।
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पुराणों में बताया गया है कि जब सृष्टि की रचना की शुरुआत में ब्रह्मा जी ने ध्यान किया। इस दौरान उन्होंने में भक्ति और धर्म का प्रचार करने का संकल्प लिया। ऐसा माना जाता है कि उसी संकल्प से नारद मुनि का अवतरण हुआ।
क्यों खास हैं नारद मुनि?
पौराणिक कथा के अनुसार, पिछले जन्म में नारद ‘उपबर्हण’ नाम के गंधर्व थे। एक समय ऐसा आया जब अप्सराएँ और गंधर्व गीत से ब्रह्मा जी की उपासना कर रहे थे। उस दौरान उपबर्हण रासलीला में लीन हो गए। इस दृश्य को देख ब्रह्मा जी को क्रोध आया। उन्होंने उपबर्हण को श्राप दे दिया कि तुम्हारा अगला जन्म शूद्र योनि में होगा।
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इसके बाद उपबर्हण ने भक्ति की, जिससे उन्हें एक बार प्रभु के दर्शन हुए। ऐसे में प्रभु के प्रति उनकी आस्था और गहरी हो गई। इस दौरान आकाशवाणी हुई कि ‘हे बालक इस जन्म में तुमको मेरे दर्शन नहीं मिल पाएंगे।’ अगले जन्म में तुम मेरे पार्षद होंगे। इसके बाद नारद मुनि में जगत के पालनहार विष्णु की कठिन तपस्या करने के फैसला लिया, जिसके बाद ब्रह्मा जी मानस पुत्र के रूप में अवतरित हुए।
नारद जयंती का महत्व क्या है?
सनातन धर्म में नारद जयंती का बड़ा महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और नारद जी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मनोकामनाएं पूरी होने का आशीष मिलता है। इस दिन पूजा पाठ, दान पुण्य और विष्णु आराधना का विशेष महत्व माना गया है।
