घर ला रहे हैं गणपति जी को, नोट कर लीजिए नियम, स्थापना का सबसे बढ़िया मुहूर्त जानिए
Ganesh Chaturthi 12 rules : अगर आप इस बार घर पर बप्पा ला रहे हैं तो कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना जरूरी है। ऐसे में आइए जानते हैं गणेश स्थापना से जुड़े नियमों के बारे में।
- Written By: सीमा कुमारी
जान लें गणेश स्थापना से जुड़े ये नियम (सौ.डिजाइन फोटो)
Ganesh Chaturthi 12 rules 2025: 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत कुछ दिनों में होने जा रही है। गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का एक खास त्योहार है, जो भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में हर साल मनाया जाता है। इस दिन भक्तगण अपने घरों में बप्पा की स्थापना करते हैं और उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। अगर आप इस बार घर पर बप्पा ला रहे हैं तो कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना जरूरी है, ताकि पूजा पूर्ण विधि-विधान से हो और आपकी हर मनोकामना पूरी हो। ऐसे में आइए जानते हैं गणेश स्थापना से जुड़े ये नियम।
ये रहेगा गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी की शुरुआत 26 अगस्त 2025 की दोपहर 01:54 बजे से होगी और यह तिथि 27 अगस्त की दोपहर 03:44 बजे तक रहेगी।
गणेश जी की स्थापना और पूजा के लिए सबसे शुभ समय 27 अगस्त 2025 का है। इस दिन आप सुबह के समय या दोपहर के शुभ मुहूर्त में बप्पा को घर ला सकते हैं। वहीं 6 सितंबर 2025 को गणेश विसर्जन होगा, जो कि अनंत चतुर्दशी का दिन है।
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ये है गणेश विसर्जन के शुभ मुहूर्त
गणेश विसर्जन (06 सितंबर 2025, शनिवार – अनंत चतुर्दशी)
गणेश प्रतिमा का विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है।
शुभ मुहूर्त (अनंत चतुर्दशी) 2025:
पहला शुभ मुहूर्त: शाम 06:37 बजे से रात 08:02 बजे तक।
दूसरा शुभ मुहूर्त: रात 09:28 बजे से अगली सुबह 01:45 बजे तक।
जान लें गणेश स्थापना से जुड़े ये नियम :
गणेश चतुर्थी पर पूजा का पूरा फल पाने के लिए बप्पा की स्थापना करते समय कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है। जो इस प्रकार है-
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गणेश जी की सूंड
हिन्दू ग्रथों के अनुसार, अगर आप इस बार घर पर बप्पा ला रहे हैं तो सबसे पहले गणेश जी की सूंड पर विशेष ध्यान रखें यानी हमेशा ऐसी प्रतिमा लें, जिसमें गणेश जी की सूंड बाईं ओर मुड़ी हो। शास्त्रों के अनुसार, ऐसी प्रतिमा यानी मूर्ति घर पर लाना शुभ होता है। इस प्रकार की मूर्तिया की पूजा से शीघ्र ही शुभ फल मिलता है।
वही, दाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा को सिद्धिविनायक स्वरूप माना जाता है और इसकी पूजा के लिए कुछ कठोर नियमों का पालन करना पड़ता है।
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साफ सफाई का रखें ध्यान
गणेश स्थापना से साफ सफाई का रखें ध्यान। स्थापना से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ करें और गणेश प्रतिमा रखने से पहले वहां गंगाजल छिड़कें।
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चौकी या आसन
गणेश स्थापना से पहले प्रतिमा को सीधे ज़मीन पर न रखें। एक साफ चौकी या पाटे पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर ही प्रतिमा स्थापित करें।
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मिट्टी की प्रतिमा
शास्त्रों के अनुसार, मिट्टी से बनी प्रतिमा की पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है। इसलिए मूर्ति चयन करते समय मिट्टी से बनी प्रतिमा ही खरीदें।
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मूर्ति स्थापना का मुहूर्त
गणेश जी की प्रतिमा चतुर्थी तिथि में ही स्थापित करें। रात में प्रतिमा स्थापना करना शुभ नहीं माना जाता है।
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दिशा का भी रखें ध्यान
गणेश जी की प्रतिमा को हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करना चाहिए। यह दिशा पूजा-पाठ के लिए सबसे शुभ मानी जाती है।
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आकार का भी रखें ध्यान
प्रतिमा का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। घर पर पूजा के लिए छोटी प्रतिमा ही श्रेष्ठ मानी जाती है, जिसे आसानी से विसर्जित किया जा सके।
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अभिषेक और प्राण प्रतिष्ठा
प्रतिमा स्थापित करने के बाद, उनका अभिषेक करें। इसके बाद, “प्राण प्रतिष्ठा” मंत्र का जाप करते हुए प्रतिमा में प्राण डालें। यह मंत्र पूजा को पूर्णता प्रदान करता है।
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सिंदूर और दूर्वा का महत्व
गणेश जी की पूजा में सिंदूर और दूर्वा अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। कहा जाता है इसके बिना गणेश जी की पूजा अधूरी मानी जाती है।
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मोदक का प्रसाद जरूर चढ़ाएं
गणपति बप्पा को मोदक का भोग लगाना आवश्यक है। ऐसी मान्यता है कि यह उनका सबसे प्रिय प्रसाद है।
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नियमित पूजा
स्थापना के बाद दस दिनों तक सुबह-शाम विधि-विधान से गणेश जी की आरती, मंत्र जाप और भोग लगाना जरूरी है।
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व्रत का पूरी तरह करें पालन
व्रत के दौरान भक्त पूरी तरह निर्जला या फलाहार व्रत रखें। खासतौर पर महिलाएं रूप से परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु के लिए व्रत करती है।
