Ravana (Source. Pinterest)
Ravana Age At Ramayan War: रामायण की कथा हम बचपन से सुनते आए हैं, लेकिन एक सवाल आज भी लोगों के मन में कौतूहल पैदा करता है आखिर रावण की मृत्यु के समय उसकी आयु कितनी थी? क्या वह सच में हजारों वर्षों तक जीवित रहा था? आइए जानते हैं इस रहस्य से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं।
रामायण के अनुसार रावण का जन्म त्रेतायुग के अंतिम चरण के आरंभ में हुआ था। वह केवल लंका का राजा ही नहीं, बल्कि महान विद्वान, शिवभक्त और तपस्वी भी था। अपने भाइयों कुंभकर्ण और विभीषण के साथ उसने ब्रह्माजी की कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि रावण ने 10 हजार वर्षों तक तपस्या की। हर एक हजार साल में उसने अपने एक शीश की आहुति दी। जब वह दसवां शीश अर्पित करने वाला था, तभी ब्रह्माजी प्रकट हुए और प्रसन्न होकर वरदान देने को तैयार हुए।
रावण ने ब्रह्माजी से वरदान मांगा कि देवता, दानव, राक्षस, नाग, गंधर्व, किन्नर और यक्ष कोई भी उसका वध न कर सके। ब्रह्माजी ने यह वरदान दे दिया, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि नर और वानर से उसे खतरा हो सकता है। रावण ने मनुष्य और वानर को तुच्छ समझते हुए इस बात को गंभीरता से नहीं लिया।
रावण ने केवल ब्रह्माजी ही नहीं, बल्कि भगवान शिव की भी एक हजार वर्षों तक कठोर स्तुति की। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उसे अमरता का वरदान दिया, लेकिन शर्त रखी कि यदि वह माता सीता का अपहरण करेगा तो उसकी मृत्यु निश्चित होगी।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रावण ने लगभग 10 हजार वर्षों तक लंका पर शासन किया। जब भगवान राम के साथ उसका युद्ध हुआ और अंततः उसका वध हुआ, तब उसकी आयु लगभग 40 हजार वर्ष बताई जाती है। हालांकि कुछ विद्वानों का मत है कि उसकी आयु 10 हजार वर्ष से अधिक थी, क्योंकि ब्रह्माजी के वरदान के कारण वह दीर्घायु हुआ।
रावण की सटीक आयु के बारे में कोई प्रमाणिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। फिर भी अधिकांश मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के समय उसकी आयु लगभग 40 हजार वर्ष मानी जाती है। रावण की कथा हमें यह भी सिखाती है कि चाहे शक्ति और वरदान कितने भी बड़े क्यों न हों, अहंकार अंततः विनाश का कारण बनता है।