होलिका दहन(सौ.सोशल मीडिया)
Holika Dahan Puja: फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होलिका दहन भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। इस वर्ष यह पर्व 3 मार्च को मनाया जाएगा और अगले दिन 4 मार्च को धुलेंडी पर रंगों का त्योहार मनाया जाएगा।
यह अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का दिव्य प्रतीक है। इस दिन संध्या समय विधि-विधान से होलिका दहन किया जाता है और भक्तजन अपने जीवन से नकारात्मकता, पाप और अहंकार को दूर करने का संकल्प लेते हैं। ज्योतिषयों के अनुसार, होलिका दहन के दिन कुछ आसान उपाय करने से घर में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति आती है।
ज्योतिषयों के अनुसार, होलिका दहन पर घर की सुख-समृद्धि के लिए मुख्य द्वार पर दोमुखा दीपक जलाएं, होलिका में घी में भीगी लौंग, बताशा, पान का पत्ता चढ़ाकर 11 परिक्रमा करें, और गूलर या अरंड की लकड़ियां जलाएं। घर में सकारात्मकता के लिए होलिका की राख लाकर घर के कोनों में छिड़कें और 7 मीठे पुए का भोग लगाकर पूजा करें।
होलिका दहन के दिन घर के मुख्य द्वार और पूरे घर को साफ-सुथरा रखें, क्योंकि गंदगी नकारात्मक ऊर्जा लाती है।
कहा जाता है कि, होलिका दहन के दिन दीपक जलाने, साफ-सुथरा रखने के अलावा, अग्नि पूजा करना भी बहुत ही शुभ होता है। इसलिए इस दिन अग्नि पूजा जरूर करें। होलिका की आग में उपले, कपूर, और पीली सरसों डालकर सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाएं।
होलिका दहन के दूसरे दिन सुबह होलिका की राख को घर के कोनों में छिड़कने से घर के झगड़े खत्म होते हैं।
होलिका की राख को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से बरकत बनी रहती है।
इस दिन सात्विक भोजन करें और देर रात तक घर से बाहर रहने से बचें।
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होलिका दहन के दिन सबसे पहले श्रद्धा के साथ पूजा करें। इसके बाद अग्नि के चारों ओर 11 बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय अपनी समस्याओं के समाधान की प्रार्थना करें। मान्यता है कि 11 परिक्रमा करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।
होलिका दहन के बाद घर में प्रवेश करने से पहले पैर धोएं और मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं।