रंगों का त्योहार होली (सौ.सोशल मीडिया)
Holi Kyon Manaya Jata Hai:होली भारत के सबसे रंगीन और उल्लासपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह केवल रंग खेलने का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द और आपसी भाईचारे का प्रतीक भी है। फाल्गुन माह में मनाई जाने वाली होली का त्योहार जिसे पूरे देश में उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है।
लोक मान्यता के अनुसार, होली, जिसे “रंगों का त्योहार” कहा जाता है, मुख्य रूप से बुराई पर अच्छाई की विजय और राधा-कृष्ण के निस्वार्थ प्रेम के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है। यह वसंत ऋतु के आगमन, पुरानी गलतियों को माफ करने, रिश्तों को नए सिरे से जोड़ने और आपसी भाईचारा बढ़ाने का एक सांस्कृतिक व सामाजिक उत्सव है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, राक्षस राजा हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान भक्ति से रोकने के लिए अनेक प्रयास किए। अंत में उसने अपनी बहन होलिका को आग में बैठने का आदेश दिया, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान था। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका दहन हो गई।
यह घटना बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक मानी जाती है।
मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने राधा और गोपियों के साथ रंगों से होली खेली थी। यह परंपरा प्रेम, आनंद और निस्वार्थ भाव को दर्शाती है। ब्रज क्षेत्र में आज भी होली विशेष उत्साह के साथ मनाई जाती है।
होली फाल्गुन पूर्णिमा को मनाई जाती है, जो सर्दियों के अंत और वसंत ऋतु के स्वागत का प्रतीक है। यह समय नई फसल और प्रकृति में रंग-बिरंगे फूलों के खिलने का होता है, इसलिए इसे खुशियों के उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
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होली सामाजिक भेदभाव को मिटाने और आपसी भाईचारे को बढ़ाने का अवसर देती है। इस दिन लोग गिले-शिकवे भूलकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और गले मिलते हैं।
इसीलिए होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, एकता और सकारात्मकता का संदेश देने वाला महापर्व है।