हरियाली तीज के अगले ही दिन दूर्वा गणेश चतुर्थी, आखिर बप्पा को क्यों चढ़ाई जाती हैं 21 दूर्वा? जानें खास वजह

Durva Ganesh Vrat Puja : हरियाली तीज के अगले दिन दूर्वा गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है। जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और खास महत्व।

Durva Ganesh Chaturthi Puja Vidhi
गणेश जी(सौ.जैमिनी)
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Durva Ganesh Chaturthi Puja Vidhi: सावन का महीना देवों के देव महादेव की आराधना के अलावा, गणेश जी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। हर साल सावन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को दूर्वा गणेश चतुर्थी का पर्व भी मनाया जाता है। जो कि इस बार हरियाली तीज के दूसरे दिन यानी 16 अगस्त को मनाई जाएगी।

धार्मिक एवं ज्योतिष मान्यता के अनुसार, इस दिन गणपति को दूर्वा अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। जानिए सावन की दूर्वा गणेश चतुर्थी 2026 कब है और इस दिन शुभ मुहूर्त क्या-क्या रहेंगे।


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सावन की दूर्वा गणेश चतुर्थी 2026 कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल चतुर्थी तिथि की शुरुआत 15 अगस्त 2026 को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन 16 अगस्त की शाम 4 बजकर 52 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर दूर्वा गणेश चतुर्थी का व्रत और पूजा 16 अगस्त को की जाएगी।

तिथि और मुहूर्त

चतुर्थी तिथि आरंभ: 15 अगस्त 2026 को शाम 05:28 बजे

चतुर्थी तिथि समाप्त: 16 अगस्त 2026 को शाम 04:52 बजे

पूजा की अवधि: 16 अगस्त को लगभग 2 घंटे 38 मिनट का शुभ समय मिलेगा।


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चतुर्थी तिथि का महत्व

शिवमहापुराण में चतुर्थी तिथि पर गणेश जी की विधिपूर्वक पूजा करने का महत्व बताया गया है। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति सुख और कल्याण की कामना से श्रद्धापूर्वक गणेश जी की आराधना करता है, उसे भगवान गणपति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

क्यों है बप्पा को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा?

पौराणिक कथा के अनुसार, अनलासुर नामक दैत्य के आतंक से सभी परेशान थे। गणेश जी ने उसका अंत करने के लिए उसे निगल लिया, लेकिन इससे उनके पेट में तेज जलन होने लगी। कई उपायों से राहत नहीं मिली। तब कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठें गणेश जी को दीं। दूर्वा ग्रहण करने के बाद उनकी जलन शांत हो गई। तभी से गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा मानी जाती है।

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