संकष्टी चतुर्थी पर भंडारा के गणेश मंदिरों में विशेष पूजा, अभिषेक और भजन-कीर्तन की तैयारी

Sankashti Chaturthi 2026: 3 जुलाई को संकष्टी चतुर्थी के अवसर पर भंडारा जिले के गणेश मंदिरों में विशेष पूजन, अभिषेक, गणपति अथर्वशीर्ष पाठ, भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन होगा।
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Ganesh Temple (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Bhandara Ganesh Temple: आगामी 3 जुलाई को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी जिलेभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश को समर्पित इस व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिविधान से गणेश पूजन और चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करने से जीवन के संकट दूर होते हैं तथा सुखसमृद्धि और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है।

जिले के गणेश मंदिरों में विशेष तैयारियां भंडारा शहर के मेंढा स्थित भृशुंड गणेश मंदिर की दूरदूर तक मान्यता है। इसके अलावा बड़ा बाजार सहित शहर के अन्य गणेश मंदिरों तथा लाखनी, तुमसर, मोहाडी, साकोली, पवनी और लाखांदुर क्षेत्र के मंदिरों में संकष्टी चतुर्थी को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

संकष्टी चतुर्थी पर गणपति बप्पा की विशेष आराधना

मंदिरों में सुबह से विशेष पूजाअर्चना, अभिषेक, गणपति अथर्वशीर्ष पाठ, आरती और भजनकीर्तन का आयोजन होगा। शाम को बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचेंगे। मंदिर समितियों ने दर्शन और प्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था की है।

जिलेभर के मंदिरों में तैयारियां पूरी

ग्रामीण क्षेत्रों में भी रहेगी विशेष आस्था ग्रामीण क्षेत्रों में भी संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है। कई परिवार पूरे दिन निर्जल या फलाहार व्रत रखेंगे और रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, लड्डू और नारियल अर्पित करेंगे। महिलाओं के साथ युवा और बुजुर्ग भी श्रद्धापूर्वक यह व्रत करते हैं। जिले के अनेक गांवों में सामूहिक गणेश आरती और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पूजन से दूर होती हैं विघ्नबाधाएं

धार्मिक मान्यता के अनुसार संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा से विघ्नबाधाएं दूर होती हैं, परिवार में सुखशांति बनी रहती है और कार्यों में सफलता मिलती है। विशेष रूप से विद्यार्थी, व्यापारी और नौकरीपेशा लोग इस दिन गणपति बप्पा का आशीर्वाद लेने मंदिरों में पहुंचते हैं।

ज्योतिषाचार्यों ने बताया पूजन का महत्व स्थानीय ज्योतिषाचार्यों के अनुसार व्रती सुबह स्नान कर भगवान गणेश का पूजन करें तथा उन्हें लाल पुष्प, दूर्वा, सिंदूर और मोदक अर्पित करें। दिनभर व्रत रखने के बाद रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है।

भंडारा में संकष्टी चतुर्थी का उल्लास

आस्था के साथ संस्कृति का भी पर्व जिले में संकष्टी चतुर्थी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का भी प्रतीक है। शहर से लेकर गांवों तक गणेश मंदिरों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ और सामूहिक पूजाअर्चना जिले की धार्मिक संस्कृति को जीवंत बनाती है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर समितियों और स्थानीय प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं।

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