

Gauri Vrat Shubh Muhurat: पांच दिवसीय गौरी व्रत इस बार 25 जुलाई से शुरु होकर 29 जुलाई तक चलने वाली है। इस व्रत की शुरुआत हर साल देवशयनी एकादशी से होती है और समापन गुरु पूर्णिमा के दिन होता है। इस व्रत में माता गौरी की पूजा होती है। पांच दिनों तक रखे जाना वाला यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव की विशेष कृपा दिलाता है।
मान्यताओं अनुसार गौरी व्रत रखने से अविवाहित कन्याओं को अच्छे वर की प्राप्ति होती है, तो वहीं सुहागिन महिलाएं ये व्रत अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं। यहां आप जानेंगे गौरी व्रत की पूजा का मुहूर्त, विधि और महिमा -
पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जुलाई 2026 को सुबह 9:12 बजे प्रारंभ होगी और 25 जुलाई 2026 को दिन में 11:34 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर गौरी व्रत का आरंभ 25 जुलाई 2026, शनिवार से मनाया जाएगा ।
गौरी व्रत के प्रथम दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:16 बजे से 4:57 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक शुभ माना गया है। इसके अलावा सुबह 7:21 बजे से 9:03 बजे तक शुभ-उत्तम मुहूर्त तथा शाम 7:17 बजे से 8:34 बजे तक लाभ-उन्नति मुहूर्त में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
गौरी व्रत पांच दिनों तक निरंतर किया जाता है। इस दौरान व्रती सुबह और शाम पूजा-अर्चना करती हैं। कई स्थानों पर अंतिम दिन रात्रि जागरण की परंपरा भी निभाई जाती है पांचवें दिन विधिपूर्वक पूजा संपन्न कर व्रत का पारण किया जाता है और नमक युक्त भोजन ग्रहण किया जाता है।
मान्यताओं अनुसार गौरी व्रत रखने से अविवाहित कन्याओं को अच्छे वर की प्राप्ति होती है, तो वहीं सुहागिन महिलाएं ये व्रत अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं। कहते हैं इस व्रत को रखने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सौहार्द बना रहता है। साथ ही घर में सुख-शांति आती है।