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Neem Karoli Baba: आखिर हर मौसम में कंबल क्यों ओढ़े रहते थे नीम करोली बाबा? जानिए इसके पीछे का रहस्य
- Written By: रीता राय सागर
Neem Karoli Baba In Hindi: 15 जून को नैनीताल स्थित नीम करोली बाबा के स्थापना दिवस के मौके पर सबसे बड़ा भंडारा आयोजित किया जाता है। उनके भक्त मानते है कि इस दिन खुद नीम करोली बाबा भंडारा संभालते है।

नीम करोली बाबा (फोटो.सोशल मीडिया)
Neem Karoli Baba Se Jude Rahasya: नीम करोली बाबा साधु संतों में एक ऐसा नाम हैं, जिनके भक्त न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी है। उनके आस्था की गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती है।
उनके भक्तों में आम से लेकर खास तक सब शामिल है। नीम करोली बाबा के अनुयायियों में विराट कोहली, अनुष्का शर्मा, स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग जैसे बड़े नाम शामिल हैं। बाबा का जीवन जितना सरल था, उतना ही रहस्यमय भी। उनके जीवन से जुडा एक विषय आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर करता है। वह है उनका कंबल, जिसे बाबा हर मौसम में ओढे रहते थे। क्या है बाबा के कंबल का रहस्य।
हर मौसम में कंबल
गर्मी हो या सर्दी, नीम करोली बाबा को हमेशा कंबल ओढ़ें ही देखा गया। भक्तों के लिए यह दृश्य सामान्य था, लेकिन जब भी नए लोग बाबा के दर्शन के लिए जाते, उनके मन में प्रश्न उठता था कि आखिर ऐसा क्यों। क्या यह केवल एक आदत थी या इसके पीछे कोई गहरा कारण छिपा था। कैंची धाम के पुराने सेवक बताते हैं कि बाबा का कंबल साधारण वस्त्र नहीं था, बल्कि उनके जीवन दर्शन का हिस्सा था।
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वैराग्य और सादगी का प्रतीक
नीम करोली बाबा हमेशा वैराग्य और सादगी का संदेश देते थे। उनका मानना था कि इंसान को वस्तुओं से नहीं, विचारों से मुक्त होना चाहिए। उनका कंबल इसी भाव को दर्शाता था। उनका कंबल इस बात का प्रतीक था कि साधु का जीवन दिखावे से नहीं, त्याग से चलता है। एक बार जब किसी भक्त ने कंबल को ठीक करने की कोशिश की, तो बाबा ने साफ कहा, इसे ऐसे ही रहने दो। किसी भी चीज से बंधाव नहीं रखना चाहिए।
भक्तों की पीड़ा अपने ऊपर लेना
बाबा के करीबी भक्त और लेखक दादा मुखर्जी के कहे अनुसार कंबल का एक और गहरा अर्थ था। मान्यता है कि नीम करोली बाबा अपने भक्तों के दुख, रोग और कर्मों का भार स्वयं उठा लेते थे। कंबल उन पीड़ाओं को ढकने का माध्यम था। यह केवल शरीर को नहीं ढकता था, बल्कि उस त्याग को भी छुपाता था, जो बाबा दूसरों के लिए करते थे।
कंबल और आध्यात्मिक शक्ति
कई भक्तों का यह भी मानना है कि बाबा के कंबल में आध्यात्मिक शक्ति थी। कुछ लोगों का कहना है कि वह कंबल गर्मी में ठंडक और सर्दी में गर्माहट देता था। कुछ यह भी मानते हैं कि वह नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता था। भले ही यह आस्था की बात हो, लेकिन बाबा के प्रति लोगों का विश्वास आज भी उतना ही मजबूत है।
कंबल के रंग का अर्थ
नीम करोली बाबा का कंबल अक्सर धारियों वाला और हल्के रंग का होता था। हालांकि कंबल का कोई तय रंग नहीं था। भक्त मानते हैं कि यह उनके संत स्वभाव और संतुलित जीवन को दर्शाता था। रंगों की सादगी उनकी भीतर की शांति का प्रतीक मानी जाती है। उनके ज्यादातर फोटो में वे धारियों वाली एक नीली कंबल ओढ़े हुए दिखते हैं।
आज भी जीवित है परंपरा
आज भी कैंची धाम पहुंचने वाले सभी भक्त बाबा की मूर्ति पर कंबल चढ़ाते है। कई भक्त अपने घरों में बाबा के कंबल की प्रतिकृति रखते हैं। उनका विश्वास है कि इससे घर में शांति बनी रहती है और मन को सुकून मिलता है।
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कंबल में छिपा संदेश
नीम करोली बाबा का कंबल हमें यह सिखाता है कि सादगी में ही सबसे बडी शक्ति छिपी होती है। वह कंबल केवल कपडा नहीं था, बल्कि त्याग, करुणा और सेवा का प्रतीक था और यही एक संत की पहचान होती है। यही कारण है कि आज भी बाबा का कंबल लोगों के लिए आस्था और प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
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