आज है एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026, आर्थिक तंगी से दूर करेगा ‘ऋणमुक्ति स्तोत्र’, यहां से करें नोट
Sankashti Chaturthi Upay: एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026 के पावन अवसर पर ‘ऋणमुक्ति स्तोत्र’ का पाठ करने से आर्थिक तंगी दूर होने की मान्यता है। जानिए इसका महत्व, सही विधि।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान गणेश (Source. Gemini)
Ekadant Sankashti Chaturthi 2026: आज 05 मई को एकदंत संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है। हिन्दू धर्म ग्रथों में गणपति की उपासना के लिए चतुर्थी तिथि को बहुत ही शुभ एवं फलदायक बताया गया है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाने वाली संकष्टी चतुर्थी का व्रत हिंदू धर्म में बड़ा महत्व रखता है। इस दिन विधिपूर्वक गणेश जी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही शुभ फल की प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है।
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ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ
धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकदंत संकष्टी चतुर्थी (Ekadant Sankashti Chaturthi) के दिन गणपति बप्पा की साधना करने से हर मनोकामना पूरी होती है और बिगड़े काम पूरे होते हैं। इस दिन पूजा के दौरान ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए।
ऐसा माना जाता है कि ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ और मंत्रों का जप का करने से धन संबंधी परेशानी से छुटकारा मिलता है और धन लाभ के योग बनते हैं। साथ ही गणपति बप्पा की कृपा से अन्न-धन के भंडार भरे रहते हैं।
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॥ ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्र॥
ॐ स्मरामि देवदेवेशंवक्रतुण्डं महाबलम्।
षडक्षरं कृपासिन्धुंनमामि ऋणमुक्तये॥
महागणपतिं वन्देमहासेतुं महाबलम्।
एकमेवद्वितीयं तुनमामि ऋणमुक्तये॥
एकाक्षरं त्वेकदन्तमेकंब्रह्म सनातनम्।
महाविघ्नहरं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥
शुक्लाम्बरं शुक्लवर्णंशुक्लगन्धानुलेपनम्।
सर्वशुक्लमयं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥
रक्ताम्बरं रक्तवर्णंरक्तगन्धानुलेपनम्।
रक्तपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥
कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णंकृष्णगन्धानुलेपनम्।
कृष्णयज्ञोपवीतं चनमामि ऋणमुक्तये॥
पीताम्बरं पीतवर्णपीतगन्धानुलेपनम्।
पीतपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥
सर्वात्मकं सर्ववर्णंसर्वगन्धानुलेपनम्।
सर्वपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥
एतद् ऋणहरं स्तोत्रंत्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
षण्मासाभ्यन्तरे तस्यऋणच्छेदो न संशयः॥
सहस्रदशकं कृत्वाऋणमुक्तो धनी भवेत्॥
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गणेश मंत्र
ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥
ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥
ऊँ गं गणपतये नमो नमः
ॐ गं गणपतये नमः
“ॐ वक्रतुंडाय हुम्”
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आर्थिक प्रगति हेतु मंत्र
ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥
ॐ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥
ॐ गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥
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शुभ लाभ गणेश मंत्र
ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नम:।।
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सिद्धि प्राप्ति हेतु मंत्र
श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा ॥
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मंगल विधान हेतु गणेश मंत्र
गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः ।
द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः ॥
विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः ।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत् ॥
विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत् क्वचित् ।
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रोजगार प्राप्ति हेतु मंत्र
ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।
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मोहन गणेश मंत्र
ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।
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कुबेर गणेश मंत्र
ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।वक्रतुण्ड गणेश मंत्र ||
