
ये है सावन माह में पूजा-पाठ से जुड़े विशेष नियम (सौ.सोशल मीडिया)
भगवान शिव को समर्पित श्रावण माह भक्ति, तपस्या और श्रद्धा का प्रतीक के रूप जाना जाता है। इस बार श्रावण माह की शुरुआत 11 जुलाई से होने जा रही है। शिव भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए सावन महीने का बेसब्री से इंतजार करते है।
ज्योतिषयों के अनुसार, सावन के महीने में पूजा-पाठ के साथ कुछ विशेष नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में कुछ काम करने से बचना चाहिए। अगर आप इन कार्यों को करते हैं, तो भगवान शिव की कृपा से वंचित रह सकते हैं। ऐसे में आज आइए जानते है सावन माह में पूजा-पाठ से जुड़े विशेष नियमों के बारे में-
हिन्दू धर्म में सावन माह बड़ा महत्व रखता हैं। कहा जाता है कि इस महीने में बाल या दाढ़ी कटवाना शुभ नहीं माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन में बाल या दाढ़ी कटवाने से कार्यों में रुकावटें आ सकती हैं और सकारात्मक ऊर्जा में कमी हो सकती है। इसलिए सनातन धर्म में सावन महीने में बाल या दाढ़ी कटवाना शुभ नहीं माना जाता है।
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दही का सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है ये तो आप जानते ही हैं लेकिन सावन के महीने में दही खाना वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन में दही खाने से शुक्र दोष उत्पन्न हो सकता है। इसके अलावा, व्यक्ति को भाग्य का साथ भी नहीं मिलता है। इसलिए सावन के महीने में दही खाना वर्जित माना जाता है।
ज्योतिष बताते है कि सावन में जो व्यक्ति सावन में व्रत करते हैं, उन्हें बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए। इसके अलावा, सावन के महीने में कांसे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए। ऐसा करना धार्मिक दृष्टि से अशुभ माना जाता है। इसलिए सावन के महीने में इन
बातों का विशेष ख्याल रखें।
स्कंद पुराण के मुताबिक, सावन में शरीर या सिर पर तेल लगाने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है। खासकर सावन के सोमवार के दिन शरीर पर तेल लगाना पूरी तरह वर्जित माना गया है। सावन में तेल के मालिश भी नहीं करनी चाहिए।






