सर्वपितृ अमावस्या के दिन कर लें ये आसान उपाय, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद
Sarva Pitru Amavasya Upay: पितृ पक्ष में आने वाली अमावस्या पितरों का आभार व्यक्त करने की तिथि है। इस बार पितृ अमावस्या 21 सितंबर को है। अमावस्या पर पितरों को याद कर पूजा और दान करते हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
सर्वपितृ अमावस्या के दिन अवश्य करें ये उपाय (सौ.सोशल मीडिया)
Sarva Pitru Amavasya 2025: यूं तो अमावस्या तिथि का सनातन धर्म में विशेष महत्व होता है। खासतौर पर, पितृ पक्ष में आने वाले अमावस्या तिथि का अलग ही महत्व होता है। जिसे सर्वपितृ अमावस्या के नाम से जाना जाता है, क्योंकि 15 दिनों के अवधि के बाद पितर अपने लोक वापस चले जाते हैं।
आपको बता दें, इस साल सर्वपितृ अमावस्या 21 सितंबर 2025 को है। शास्त्रों में यह बताया गया है कि परिवार के जिन सदस्यों का देहांत अमावस्या या चतुर्दशी तिथि के दिन होता है, उनका श्राद्ध और पिंडदान इसी दिन किया जाता है। इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र में सर्वपितृ अमावस्या से जुड़े कुछ उपायों का भी उल्लेख किया गया है जिससे पितर प्रसन्न होते हैं। ऐसे में आइए जान लेते हैं सर्वपितृ अमावस्या से जुड़े कुछ उपायों के बारे में –
सर्वपितृ अमावस्या के दिन अवश्य करें ये प्रभावशाली उपाय:
पितरों को तिलांजलि देना
ज्योतिषयों के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या के शुभ अवसर पर तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध कर्म करना बहुत ही शुभ होता है। इस दिन विधि-विधान से पितरों को तिलांजलि प्रदान करने से जीवन में आ रही समस्याओं से निजात मिलता है। अगर आप समस्याओं से घिरे हुए हों, तो इस दिन पितरों को तिलांजलि देना न भूलें।
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पशु-पक्षियों को भोजन
कहते है,पितृपक्ष के अंतिम दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या में पशु-पक्षियों की सेवा को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए विशेष रूप से अमावस्या तिथि के दिन पशु-पक्षियों को भोजन जरूर कराएं। ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
दान-पुण्य करना
ज्योतिष बताते है कि, पितृपक्ष के अंतिम दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या के दिन दान-पुण्य को सबसे उत्तम माना जाता हैं। इसलिए इस दिन अनाज, वस्त्र, घी, काले तिल इत्यादि का दान कर सकते हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा दृष्टि अपने वंशजों पर बनाए रखते हैं।
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गरीबों एवं असहायों भोजन कराना
सर्वपितृ अमावस्या के दिन गरीबों एवं असहायों भोजन कराना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से कई प्रकार के ग्रह दोष दूर होते हैं और लाभ प्राप्त होता है। साथ ही व्यक्ति को पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
