पूजा घर में न करें ये गलतियां (सौ.सोशल मीडिया)
घर के मंदिर को घर की सबसे शुद्ध और पवित्र जगह माना जाता है। वास्तु शास्त्र में घर के मंदिर की सही दिशा से लेकर कई बारीकियों के बारे में बताया गया है। जिनका पालन करने से घर खुशी और समृद्धि का ठिकाना बन सकता है। वहीं इनकी अनदेखी घर की सुख-शांति, बरकत सब कुछ छीन लेती है।
इसलिए पूजा घर में वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करना चाहिए। आज हम जाने-अनजाने में पूजा घर में की जाने वाली उन गलतियों को बताते हैं जो वास्तुदोष की वजह बनती हैं।
दक्षिण दिशा में बना मंदिर भयंकर वास्तु दोष पैदा करता है क्योंकि दक्षिण दिशा यमराज और पितरों की दिशा होती हैं। ये गलती कभी ना करें। ये घर-परिवार पर संकट ला सकता है।
घर में कभी भी देवी-देवताओं के रौद्र रूप वाली मूर्ति या तस्वीरें ना रखें। हमेशा सौम्य मुद्राओं वाले स्वरूप ही रखें। साथ ही घर में शनिदेव की मूर्ति भी नहीं रखनी चाहिए।
देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां या फटी हुई तस्वीरें रखना अपने हाथों दुर्भाग्य को बुलावा देना है। ऐसी गलती भी ना करें। ना ही कांच, प्लास्टिक की मूर्ति रखें। देवी-देवताओं की मूर्तियां मिट्टी, सोना, चांदी, पीतल या अष्टधातु की ही हों।
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मंदिर में कभी भी गंदगी ना रहने दें। पूजा स्थल हमेशा साफ और पवित्र रहे, इस बात का ध्यान रखें।
मंदिर के आसपास जूते-चप्पल, झाड़ू, कूड़ादान जैसी अपवित्र चीजें नहीं रखें।
मंदिर में कभी भी पूर्वजों की फोटो ना रखें। भगवान के साथ पूर्वजों की फोटो रखना बड़ा वास्तु दोष पैदा करता है और यह गरीबी-दुख समेत कई मुसीबतें देता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मंदिर हमेशा ईशान कोण में होना चाहिए। इस दिशा में देवी-देवता निवास करते हैं। इस वजह से यह दिशा सबसे पवित्र मानी जाती है। ईशान कोण यानी उत्तर कोण में मंदिर बनवाने से भगवान का आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है। इस बात का ध्यान रखें कि मंदिर की दिशा भूलकर भी दक्षिण की तरफ नहीं होनी चाहिए। इससे घर में दरिद्रता छा सकती है।