Premanad Ji Maharaj (Source. Pinterest)
Naam Jap: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान धन, पद और परिवार के पीछे इतना खो गया है कि अपने असली उद्देश्य को भूल चुका है। इसी सत्य को समझाते हुए श्री प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि यह मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है, लेकिन हम इसे क्षणभंगुर सुखों में व्यर्थ कर रहे हैं। वह स्पष्ट कहते हैं, “यदि आप नाम जप नहीं करते और भगवान की शरण नहीं लेते, तो आप स्वयं अपने पतन का रास्ता बना रहे हैं।”
महाराज जी समझाते हैं कि यह संसार एक माया है। पत्नी, बच्चे, धन और प्रतिष्ठा ये सब एक दिन साथ छोड़ देंगे। वे चेतावनी देते हैं कि अगर मनुष्य भगवान का नाम नहीं जपेगा, तो चाहे आज वह कितना भी बड़ा अधिकारी या राजा क्यों न हो, अगले जन्म में उसका स्वरूप कुछ भी हो सकता है। “हर एक सांस अनमोल है, एक पल भी व्यर्थ मत गंवाओ, अभी से ‘राधा-राधा’ का जाप शुरू करो।”
बहुत लोग यह सोचते हैं कि केवल परिवार की जिम्मेदारियां निभाना ही पर्याप्त है, लेकिन यह अधूरा सत्य है। महाराज जी के अनुसार, “मानव शरीर का उद्देश्य भगवान को प्राप्त करना है, न कि केवल भोग-विलास में लिप्त रहना।” अगर व्यक्ति भजन नहीं करता, तो वह अपने मुख्य कर्तव्य से भटक जाता है और आध्यात्मिक रूप से नीचे गिरता है।
आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए सही संगति बेहद जरूरी है। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को धर्म और भक्ति का मार्ग दिखाएं। मित्र और भाई भी ऐसे होने चाहिए, जो हमें ईश्वर के करीब ले जाएं। साथ ही, सच्चा गुरु वही है, जो शिष्य से कोई स्वार्थ न रखे और केवल उसकी मुक्ति की कामना करे।
महाराज जी बताते हैं कि अहंकार भक्त का सबसे बड़ा दुश्मन है। चाहे वह धन, ज्ञान या भक्ति का अहंकार हो, यह व्यक्ति को भगवान से दूर कर देता है। “जब तक ‘मैं’ है, तब तक भगवान नहीं हैं; और जब ‘मैं’ मिट जाता है, तब केवल वही रहते हैं।”
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सच्ची भक्ति केवल कुछ घंटों की पूजा नहीं है, बल्कि हर पल भगवान का स्मरण करना है। मृत्यु के समय मन में जो विचार होगा, वही अगले जन्म का निर्धारण करेगा। इसलिए हर समय भगवान के नाम, रूप और लीलाओं का चिंतन करना जरूरी है। महाराज जी कहते हैं कि इंसान को हंस और भंवरे की तरह होना चाहिए, जो केवल सार को ग्रहण करते हैं।
अंत में, महाराज जी का संदेश साफ है सब कुछ भगवान को समर्पित कर दें। “सभी धर्मों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ, मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूंगा।” यही मार्ग माया पर विजय पाने और सच्चे परम आनंद को प्राप्त करने का एकमात्र उपाय है।