क्या सच में मंथरा को राम से बैर था? जानिए वो वजह जिसने बदली पूरी रामायण

Manthara Ramayan Story: रामायण की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक है भगवान राम का वनवास। लेकिन इस घटना के पीछे जिस नाम का सबसे ज्यादा जिक्र होता है, वह है मंथरा।
Manthara truly harbor animosity towards Rama reason that changed the entire Ramayana.
Manthara and ram (Source. Pinterest)
Updated on

Ram Vanvas Reason: रामायण की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक है भगवान राम का वनवास। लेकिन इस घटना के पीछे जिस नाम का सबसे ज्यादा जिक्र होता है, वह है मंथरा। अक्सर लोग मानते हैं कि मंथरा को राम से गहरा बैर था, इसलिए उसने कैकेयी के कान भरकर राम को वनवास भिजवा दिया। लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा जटिल और दिलचस्प है।

क्या सच में मंथरा को राम से नफरत थी?

मंथरा को भगवान राम से व्यक्तिगत रूप से कोई बैर नहीं था। वह कैकेयी की धाय मां थी और बचपन से ही उनका ख्याल रखती आई थी। उसका हर निर्णय कैकेयी और उनके पुत्र भरत के हित को ध्यान में रखकर होता था। दरअसल, मंथरा की सोच सीमित थी और वह राजधर्म या बड़े आदर्शों को समझने में सक्षम नहीं थी। इसी वजह से वह अक्सर राम और भरत की तुलना करती रहती थी और भरत को अधिक योग्य मानती थी।

भरत के प्रति लगाव बना वजह

मंथरा का झुकाव हमेशा भरत की तरफ रहा। वह चाहती थी कि भरत ही अयोध्या के राजा बनें। इसी सोच के चलते उसके मन में धीरे-धीरे राम के प्रति एक नकारात्मक भावना विकसित हो गई। हालांकि यह भावना व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी, बल्कि एक पक्षपातपूर्ण सोच का परिणाम थी, जो उसे सही और गलत में फर्क करने से रोक रही थी।

दशरथ का वादा बना बड़ा कारण

एक और महत्वपूर्ण कारण राजा दशरथ का वह वादा था, जो उन्होंने कैकेयी के पिता से विवाह के समय किया था। उस समय दशरथ के कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने यह आश्वासन दिया था कि कैकेयी से उत्पन्न पुत्र ही राजगद्दी का उत्तराधिकारी होगा। बाद में परिस्थितियां बदलीं और राम सबसे बड़े तथा सबसे योग्य होने के कारण राजा बनाए जाने लगे। यही बात मंथरा को खटक रही थी, क्योंकि वह उस पुराने वादे को सच होते देखना चाहती थी।

कर्तव्य या कुटिलता?

मंथरा खुद को कैकेयी का हितैषी मानती थी और उसे लगता था कि कैकेयी को उसका अधिकार दिलाना उसका कर्तव्य है। लेकिन उसकी अल्प समझ और कुटिल बुद्धि ने उसे गलत दिशा में ले जाया। वह राम और भरत के त्याग, प्रेम और उच्च विचारों को समझ ही नहीं पाई।

आखिरकार क्या हुआ?

इन्हीं कारणों के चलते मंथरा ने कैकेयी को भड़काया और परिणामस्वरूप राम को वनवास जाना पड़ा। यह घटना हमें यह सिखाती है कि अधूरी जानकारी और पक्षपातपूर्ण सोच कैसे बड़े फैसलों को गलत दिशा में मोड़ सकती है।

Navbharat Live
navbharatlive.com