मां सिद्धिदात्री (सौ.AI)
Chaitra Navratri Mahanavami Puja: इस वर्ष 27 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन यानी महानवमी पर देवी दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि, चैत्र नवरात्रि के आखिरी दिन भक्त की सच्चे मन से की गई पूजा से उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। वहीं राम नवमी पर अयोध्या में रामलला का दोपहर 12 बजे सूर्य तिलक होगा।
मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। उनके हाथों में गदा, चक्र, कमल और शंख विराजमान रहते हैं। मां सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान होती हैं। मां का स्वरूप अत्यंत शांत, दिव्य और कल्याणकारी है, जो भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करता है।
नवमी के दिन बैंगनी रंग पहनना शुभ रहेगा। साथ ही इस दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा करें। चार भुजाओं वाली देवी सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है। वे कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है। इन्हें कमलारानी भी कहते हैं। मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्तों को सिद्धियां प्राप्त होती हैं।
नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन और हवन का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त तीन हैं।
सुबह का शुभ समय: प्रातः 06:18 बजे से 10:15 बजे तक (यह समय कलश विसर्जन और पूजा के लिए श्रेष्ठ है।
राम जन्मोत्सव मुहूर्त: दोपहर 11:13 बजे से 01:41 बजे तक (राम नवमी की मुख्य पूजा इसी समय की जाएगी।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 बजे से 12:51 बजे तक।
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मां सिद्धिदात्री को प्रसन्न करने के लिए उन्हें हलवा, पूड़ी और चना का भोग लगाना विशेष रूप से फलदायी माना गया है। इसके अतिरिक्त खीर, नारियल, सफेद मिठाइयां और मौसमी फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। श्रद्धा से अर्पित किया गया भोग मां को अत्यंत प्रिय होता है।