चैत्र नवरात्रि की महानवमी को ऐसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा, जानिए उनका स्वरूप, पूजा विधि और विशेष मंत्र
Navratri Mahanavami Mantra: चैत्र नवरात्रि की महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से सिद्धि, सफलता और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।
- Written By: सीमा कुमारी
मां सिद्धिदात्री (सौ.AI)
Chaitra Navratri Mahanavami Puja: इस वर्ष 27 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन यानी महानवमी पर देवी दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि, चैत्र नवरात्रि के आखिरी दिन भक्त की सच्चे मन से की गई पूजा से उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। वहीं राम नवमी पर अयोध्या में रामलला का दोपहर 12 बजे सूर्य तिलक होगा।
मां सिद्धिदात्री का स्वरूप
मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। उनके हाथों में गदा, चक्र, कमल और शंख विराजमान रहते हैं। मां सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान होती हैं। मां का स्वरूप अत्यंत शांत, दिव्य और कल्याणकारी है, जो भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करता है।
अष्ट सिद्धियां देती हैं मां सिद्धिदात्री
नवमी के दिन बैंगनी रंग पहनना शुभ रहेगा। साथ ही इस दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा करें। चार भुजाओं वाली देवी सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है। वे कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है। इन्हें कमलारानी भी कहते हैं। मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्तों को सिद्धियां प्राप्त होती हैं।
सम्बंधित ख़बरें
Bada Mangal: ज्येष्ठ का दूसरा बड़ा मंगल आज, संकटमोचन को प्रसन्न करने का महायोग, बस इस विधि से करें पूजा!
Second Bada Mangal: साल 2026 का दूसरा ‘बड़ा मंगल’ 12 मई को, चुपचाप कर लें ये अचूक उपाय, होगा मंगल ही मंगल!
Adhik Maas: 17 मई से शुरू हो रहा है अधिक मास, इन वस्तुओं के दान-धर्म से मिटेंगे जन्मों के पाप
वैवाहिक क्लेश से हैं परेशान, तो सोमवार के दिन महादेव को अर्पित करें ये 4 वस्तुएं, खुशहाल हो जाएगा जीवन!
सिद्धिदात्री पूजा का शुभ मुहूर्त
नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन और हवन का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त तीन हैं।
सुबह का शुभ समय: प्रातः 06:18 बजे से 10:15 बजे तक (यह समय कलश विसर्जन और पूजा के लिए श्रेष्ठ है।
राम जन्मोत्सव मुहूर्त: दोपहर 11:13 बजे से 01:41 बजे तक (राम नवमी की मुख्य पूजा इसी समय की जाएगी।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 बजे से 12:51 बजे तक।
कैसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा
- नवमी के दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान से निवृत्त हो जाएं।
- इसके बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें।
- पूजा स्थल को शुद्ध करके मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और उस पर गंगाजल छिड़कें।
- फिर रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, फल, मिष्ठान, नारियल और चुनरी अर्पित करें।
- इसके पश्चात मां के मंत्रों का जप करते हुए उनका ध्यान करें।
- इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन और नौ कन्याओं का पूजन करना चाहिए।
यह भी पढ़ें–Ram Navami 2026 की पूजा में लगाएं भोग में ये चीज़ें, श्रीराम होंगे प्रसन्न, मिलेगा विशेष आशीर्वाद
मां सिद्धिदात्री के प्रिय भोग
मां सिद्धिदात्री को प्रसन्न करने के लिए उन्हें हलवा, पूड़ी और चना का भोग लगाना विशेष रूप से फलदायी माना गया है। इसके अतिरिक्त खीर, नारियल, सफेद मिठाइयां और मौसमी फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। श्रद्धा से अर्पित किया गया भोग मां को अत्यंत प्रिय होता है।
