Budh Pradosh Vrat: आज है बुध प्रदोष, प्रदोष काल की इस मुहूर्त में करें पूजा, महिमा जानिए
Budh Pradosh Vrat Upay:आज बुध प्रदोष के शुभ अवसर पर प्रदोष काल में विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस समय भगवान शिव की आराधना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान शिव( सौ.AI)
Budh Pradosh Vrat 2026:आज 15 अप्रैल 2026 को वैशाख महीने का पहला प्रदोष व्रत है। बुध दिन पड़ने के कारण यह बुध प्रदोष व्रत कहा जाएगा। धर्म शास्त्रों में शिव कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत को सबसे उत्तम और श्रेष्ठ व्रत बताया गया है।
बुध प्रदोष व्रत का महत्व
सनातन धर्म में बुध प्रदोष व्रत का महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बुध प्रदोष व्रत पर किए पूजा-पाठ और व्रत से महादेव सारे कष्ट दूर कर देते हैं। बुध प्रदोष व्रत से शिवजी के साथ ही बुध ग्रह की कृपा भी प्राप्त होती है।
प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त
आज त्रयोदशी तिथि 15 अप्रैल को दोपहर 12:12 बजे शुरू होकर रात 10:31 बजे तक रहेगी। प्रदोष व्रत में सूर्यास्त के बाद का समय यानी प्रदोष काल सबसे महत्वपूर्ण होता है, जो लगभग 1.5 घंटे तक रहता है। आज सूर्यास्त शाम 6:46 बजे के आसपास होगा, इसलिए इसी समय के बाद पूजा करना शुभ माना जाएगा।
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कैसे करें प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक?
- प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और शाम के समय शिव मंदिर जाएं या घर पर ही शिवलिंग की पूजा करें।
- सबसे पहले शिवलिंग को शुद्ध जल और गंगाजल से स्नान कराएं।
- अगर आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, तो कच्चे दूध और शहद से अभिषेक करें।
- अगर शत्रुओं से परेशान हैं या कर्ज बढ़ा हुआ है, तो गन्ने के रस से अभिषेक करें।
- अभिषेक के बाद शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं।
- भगवान शिव को भस्म, धतूरा और आक के फूल अर्पित करें।
- शिव जी को बिल्व पत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि उसका चिकना हिस्सा शिवलिंग को स्पर्श करे।
- साथ ही बेलपत्र कटा-फटा नहीं होना चाहिए।
- प्रदोष काल में शिवलिंग के पास गाय के घी का दीपक जलाएं।
- इसके बाद ‘शिव चालीसा’ या ‘रुद्राष्टकम’ का पाठ करें।
- अंत में भक्ति भाव के साथ आरती करें।
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बुध प्रदोष का महत्व और लाभ
बुधवार का संबंध बुध ग्रह से होता है, जिसे ज्योतिष में बुद्धि, संचार और व्यापार का कारक माना गया है। इस दिन पड़ने वाले बुध प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की पूजा करने से वाणी में मधुरता आती है, निर्णय क्षमता मजबूत होती है और करियर व व्यापार में सफलता मिलने की मान्यता है।
मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं, बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और शिव कृपा से जीवन के संकट कम होते हैं।
