भगवान शिव ( सौ. Gemini)
Pradosh Vrat Evening Puja Tips: आज 15 अप्रैल को वैशाख माह का पहला बुध प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। धर्म शास्त्रों में प्रदोष व्रत में शाम की पूजा यानी ‘प्रदोष काल’ की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि सूरज ढलने के वक्त भगवान शिव सबसे ज्यादा खुशमिजाज और शांत अवस्था में होते हैं, इसलिए इस वक्त मांगी गई हर मुराद जल्दी पूरी होती है।
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि अनजाने में की गई कुछ छोटी-छोटी गलतियां आपकी पूरी दिन की मेहनत पर पानी फेर सकती हैं? आइए जानते हैं आज शाम की पूजा में आपको किन बातों का खास ख्याल रखना है, ताकि आपका व्रत सफल हो सके।
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, बुध प्रदोष व्रत (Budh Pradosh Vrat) शाम की पूजा से पहले एक बार फिर से नहाना और साफ कपड़े पहनना बहुत जरूरी होता है। पवित्र ग्रंथों और शास्त्रों में साफ तौर पर लिखा है कि अशुद्ध यानी बिना नहाए की गई पूजा का कोई फल नहीं मिलता। इसलिए, खुद को और अपने पूजा स्थल को बिल्कुल साफ रखें।
धर्म शास्त्रों में प्रदोष व्रत में शाम की पूजा यानी ‘प्रदोष काल’ की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, सूरज ढलने के आसपास का वक्त ही प्रदोष काल कहलाता है। अगर आप इस शुभ समय के निकल जाने के बाद पूजा करते हैं, तो उसका फल कम हो जाता है।
शाम की पूजा में दीया जलाना और आरती करना बहुत जरूरी है। आरती हमेशा आराम से, शांति और पूरी श्रद्धा के साथ करें। ध्यान रखें कि पूजा के दौरान दीया न बुझे। पूजा के बाद प्रसाद का बिल्कुल अपमान न करें; इसे अपने परिवार और दोस्तों में बांटें और खुद भी सम्मान के साथ खाएं।
शास्त्रों के मुताबिक, पूजा करते वक्त आपका मन शांत और पवित्र होना चाहिए। अगर आपके दिमाग में चिड़चिड़ापन या किसी के लिए जलन है, तो भोलेनाथ तक आपकी प्रार्थना नहीं पहुंचेगी। साथ ही, दिन भर सात्विक आहार ही लें।
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शिव पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है शिव पूजा में क्या चढ़ाना वर्जित है-