आषाढ़ में उगते सूरज को जल चढ़ाने वाला यह रहस्य बहुत कम लोग जानते हैं, मान्यता है बदल सकती है किस्मत
Surya Arghya: आषाढ़ मास में उगते सूर्य को जल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस सरल उपाय को श्रद्धा से करने पर सौभाग्य, आत्मविश्वास और सफलता के नए मार्ग खुल सकते हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
सूर्यदेव (सौ.सोशल मीडिया)
Surya Arghya Benefits: 30 जून 2026 से आषाढ़ मास का शुभारंभ हो रहा है, जो 29 जुलाई तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना साधना, जप-तप और देव उपासना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस पूरे महीने सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य देने से आरोग्य, आत्मबल और पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि यह छोटा-सा उपाय जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
आखिर आषाढ़ में सूर्य को जल चढ़ाने पर इतना जोर क्यों दिया जाता है?
धर्मग्रंथों में आषाढ़ मास के दौरान सूर्य उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस समय सूर्य की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है और कई प्रकार की बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। यही वजह है कि इस महीने सूर्य पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है।
सूर्य को जल चढ़ाते समय की गई यह एक छोटी-सी गलती, मान्यता है कम कर देती है पूरा फल
सूर्य देव को अर्घ्य देते समय तांबे के लोटे का प्रयोग करें। जल में लाल पुष्प, कुमकुम और अक्षत मिलाएं। जल चढ़ाते समय पात्र को चेहरे के सामने रखें और गिरती हुई जलधारा के बीच से सूर्य के दर्शन करें। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है और नेत्रों को भी लाभ मिलता है।
सम्बंधित ख़बरें
Chanakya Niti: तरक्की की राह रोक देती हैं ये 5 गलत आदतें, आचार्य चाणक्य ने बताया इनसे बचने का तरीका
30 जून से आरंभ होगा पावन आषाढ़ मास, जानें क्यों माना जाता है बेहद शुभ और किन नियमों का करें पालन
Purnima Upay: पूर्णिमा की शुभ रात जरूर करें ये आसान उपाय, धन-सुख और उन्नति के खुल सकते हैं नए द्वार
Deva Snana Purnima: देव स्नान पूर्णिमा पर 108 कलशों से स्नान का महत्व, क्यों हो जाते हैं प्रभु जगन्नाथ बीमार
मान्यता है इस एक उपाय से खुलने लगते हैं बंद किस्मत के दरवाजे
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ में नियमित रूप से सूर्य देव को अर्घ्य देने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है, नौकरी और करियर में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, अधिकारियों का सहयोग मिलता है और सरकारी कार्यों में सफलता के योग बनते हैं।
सुबह की पहली किरणों में आखिर ऐसा क्या छिपा है?
मान्यता है कि सूर्योदय के समय सूर्य की कोमल किरणें शरीर और मन दोनों पर शुभ प्रभाव डालती हैं। धार्मिक दृष्टि से इसे सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना गया है। इसी कारण इस समय सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
ये भी पढे़ं- Chanakya Niti: तरक्की की राह रोक देती हैं ये 5 गलत आदतें, आचार्य चाणक्य ने बताया इनसे बचने का तरीका
जो लोग रोज करते हैं यह उपाय, उनके बारे में क्या कहती हैं मान्यताएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित सूर्य उपासना करने वाले व्यक्ति का मन अधिक एकाग्र रहता है। उसकी निर्णय लेने की क्षमता, आत्मविश्वास और नेतृत्व शक्ति में वृद्धि होती है। साथ ही जीवन में सकारात्मक सोच और उत्साह बना रहता है।
आषाढ़ में सूर्य पूजा के बाद यह काम करने से ही पूरी मानी जाती है साधना
अर्घ्य अर्पित करने के बाद श्रद्धापूर्वक सूर्य देव को प्रणाम करें और सूर्य मंत्रों का जाप करें। मान्यता है कि इससे शक्ति, बुद्धि, यश और सम्मान में वृद्धि होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता के नए मार्ग खुलते हैं।
