मां सरस्वती (सौ.सोशल मीडिया)
Significance Of Basant Panchami: 23 जनवरी 2026 शुक्रवार को पूरे देशभर में बसंत पंचमी का पावन पर्व मनाया जाएगा। विद्या और ज्ञान की देवी सरस्वती को समर्पित बसंत पंचमी पर्व को ‘श्री पंचमी’ या ‘ज्ञान पंचमी’ के नाम से भी जाना जाता है।
लोक मान्यता के अनुसार, ये पर्व बंसत ऋतु के आने का प्रतीक माना जाता है। साथ ही इस दिन से मौसम भी बदलने लगता है। इस दिन मां सरस्वती जिन्हें ज्ञान, बुद्धि, विघा और कला की देवी कहा जाता है। उनकी पूजा की जाती है। यह पूजा स्कूल से लेकर घरों में पूरे विधि-विधान के साथ की जाती है।
हर तरह पीले वस्त्र और पीले फूलों का रंग दिखाई देगा, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को पीले रंग फूल क्यों चढ़ाए जाते हैं? साथ ही इसका धार्मिक महत्व क्या होता है, ताकि आप भी इसके बारे में अच्छे से जान सके।
शास्त्रों के अनुसार, बसंत पंचमी से ही बसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है। इस समय खेतों में सरसों के पीले फूल लहराते हुए नजर आते हैं और चारों ओर प्रकृति में नई ऊर्जा दिखाई देती है।
पीला रंग उमंग, खुशी, सकारात्मकता और नई शुरुआत का प्रतीक है। यही कारण है कि इस पर्व पर पीले रंग का विशेष महत्व होता है। इस रंग के फूल आपको बसंत पंचमी के दिन हर तरफ देखने को मिल जाएंगे।
मां सरस्वती को पीले रंग के फूल चढ़ाने का धार्मिक महत्व बताया गया है। ऐसा कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को पीले फूल, पीले वस्त्र और पीले रंग के प्रसाद से की गई पूजा से विद्या, वाणी और विवेक का आशीर्वाद मिलता है।
विद्यार्थी इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की पूजा करते हैं, ताकि पढ़ाई में एकाग्रता और सफलता मिले। वहीं घरों में इनकी पूजा सकारात्मकता के लिए की जाती है।
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इसलिए फूल आप भी इन्हें चढ़ाकर आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं। मां सरस्वती को चढ़ाने के लिए आप सरसों के फूल, गेंदे के फूल या पीले गुलाब को अर्पित कर सकती हैं। इन फूलों को पूजा में शामिल करने से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को पीले फूल चढ़ाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि इसका गहरा धार्मिक महत्व है। पीला रंग ज्ञान, सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक है। इस शुभ दिन पर श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा करने से मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं।