आज है बसंत पंचमी, जानिए पूजा का सबसे सही शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सामग्री की लिस्ट भी
Saraswati Puja Vidhi: बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा शुभ मुहूर्त में करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस अवसर पर सुबह से पूजा का समय शुरू होगा। यहां जानिए सरस्वती पूजा की विधि, सामग्री लिस्ट
- Written By: सीमा कुमारी
बसंत पंचमी
Saraswati Puja Morning Muhurat:आज 23 को पूरे देशभर में बसंत पंचमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह त्योहार हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है जो हर साल माघ महीने में मनाया जाता है। इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है।
इस दिन को श्री पंचमी तो कहीं सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन घरों और मंदिरों में ही नहीं बल्कि स्कूलों में भी मां सरस्वती की पूजा होती है। यहां आप जानेंगे बसंत पंचमी की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा और भोग समेत सभी जरूरी बातें।
बसंत पंचमी की पूजा का शुभ मुहूर्त
बसंत पंचमी की तिथि: 23 जनवरी 2026, शुक्रवार
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बसंत पंचमी पूजा मुहूर्त: सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
मुहूर्त की अवधि: 05 घंटे 20 मिनट
बसंत पंचमी मध्याह्न (पंचमी का मध्याह्न): दोपहर 12:33 बजे
पंचमी तिथि (तिथि प्रारम्भ समय)
23 जनवरी: रात 02:28 बजे से
24 जनवरी: रात 01:46 बजे तक
कैसे करें बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा
- बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठ जाएं।
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संभव हो तो इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनें।
- फिर एक साफ चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
- माता की प्रतिमा के समक्ष ही एक कलश भी स्थापित करें।
- माला पहनाएं और तिलक लगाएं।
- पूजा की शुरुआत भगवान गणेश की वंदना से करें।
- इसके बाद देवी सरस्वती की पूजा शुरू करें।
- इसके लिए सबसे पहले माता की मूर्ति को स्नान कराएं और फिर उन्हें सफेद वस्त्र पहनाएं।
- इसके बाद देवी को कुमकुम और गुलाल लगाएं। साथ में पीले फूल और माला चढ़ाएं।
- माता को इस दिन पीले चावलों, बूंदी के लड्डूओं और केसरिया खीर या हलवे का भोग लगाना बेहद शुभ होता है।
- भोग लगाने के बाद देवी सरस्वती की आरती करें और इसके बाद प्रसाद सभी में बांट दें।
कई श्रद्धालु बसंत पंचमी की पूजा के अगले दिन मां सरस्वती की मूर्ति को नदी में विसर्जित कर देते हैं।
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बसंत पंचमी का रंग
बसंत पंचमी का शुभ रंग पील है। इसलिए ही इस दिन मां सरस्वती को पीले रंग की चीजों का भोग लगाया जाता है। साथ ही लोग खुद भी पीले रंग के कपड़े पहनते हैं। इस दिन एक-दूसरे को हल्दी का तिलक लगाने की भी परंपरा है।
