माघ मेले में बसंत पंचमी का चौथा स्नान (सौ.सोशल मीडिया)
Magh Mela 2026 Basant Panchami Snan: सनातन धर्म में बसंत पंचमी का दिन बहुत ही शुभ एवं खास होता है। मान्यता के अनुसार, इस दिन ज्ञान एवं बुद्धि की देवी मां सरस्वती की पूजा पूरे देशभर में होती है। साथ ही हर कोई अच्छी शिक्षा और सफलता के लिए मां सरस्वती से कामना करते हैं। ऐसे में कई सारे लोग इस दिन शाही स्नान भी जरूर करते हैं।
हिन्दू धर्म में माघ मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है, जिसे पुराणों में “देव मास” भी कहा गया है। इस महीने में जप, तप, दान और स्नान करने से व्यक्ति को विशेष आध्यात्मिक फल प्राप्त होते हैं। इसी आस्था को केंद्र में रखकर हर वर्ष उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भव्य माघ मेले का आयोजन किया जाता है, जिसे आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम माना जाता है।
बंसत पंचमी के दिन प्रयागराज के माघ मेले में बड़ी संख्या में संगम और गंगा के तटों पर लोगों की भीड़ नजर आती है। मेला प्रशासन बंसत पंचमी के स्नान की तैयारियों में जुटा हुआ है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कल माघ मेले में बसंत पंचमी का स्नान किस समय शुरु होगा?
बताया जा रहा है कि, बसंत पंचमी माघ मेले का चौथा प्रमुख स्नान पर्व है। इससे पहले माघ मेले में पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या के पावन स्नान संपन्न हो चुके हैं। बसंत पंचमी के अवसर पर संगम और गंगा तटों पर स्नान ब्रह्म मुहूर्त में प्रारंभ होगा।
कल ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत सुबह 05 बजकर 26 मिनट से होगी, जो सुबह 06 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मेले में इस शुभ मुहूर्त में किया गया स्नान विशेष फलदायी माना जाता है।
माघ मेला के दौरान बसंत पंचमी पर होने वाला स्नान शाही स्नान कहलाता है, ऐसा इसलिए क्योंकि स्नान के साथ ही संगम का जल अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली हो जाता है। ऐसे में आप मां सरस्वती को भी स्पर्श कर पाते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर पाते हैं। स्नान करने से पापों का नाश होता है, ग्रह दोष शांत होते हैं और विद्या और बुद्धि में वृद्धि होती है। इसलिए आप इस दिन स्नान करके बसंत पंचमी के दिन को खास बना सकती हैं।
शास्त्रों में बताया गया है कि बसंत पंचमी के दिन त्रिवेणी संगम में स्नान करने से ब्रह्मा, विष्णु और महेश की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है। यह दिन मोक्ष की ओर ले जाने वाला माना जाता है, खासकर जब स्नान के साथ दान और जप भी किया जाए।
बताया जा रहा है कि, बसंत पंचमी माघ मेले का चौथा प्रमुख स्नान पर्व है। इससे पहले माघ मेले में पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या के पावन स्नान संपन्न हो चुके हैं। बसंत पंचमी के अवसर पर संगम और गंगा तटों पर स्नान ब्रह्म मुहूर्त में प्रारंभ होगा।
कल ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत सुबह 05 बजकर 26 मिनट से होगी, जो सुबह 06 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मेले में इस शुभ मुहूर्त में किया गया स्नान विशेष फलदायी माना जाता है।
माघ मेला के दौरान बसंत पंचमी पर होने वाला स्नान शाही स्नान कहलाता है, ऐसा इसलिए क्योंकि स्नान के साथ ही संगम का जल अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली हो जाता है। ऐसे में आप मां सरस्वती को भी स्पर्श कर पाते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर पाते हैं। स्नान करने से पापों का नाश होता है, ग्रह दोष शांत होते हैं और विद्या और बुद्धि में वृद्धि होती है। इसलिए आप इस दिन स्नान करके बसंत पंचमी के दिन को खास बना सकती हैं।
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शास्त्रों में बताया गया है कि बसंत पंचमी के दिन त्रिवेणी संगम में स्नान करने से ब्रह्मा, विष्णु और महेश की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है। यह दिन मोक्ष की ओर ले जाने वाला माना जाता है, खासकर जब स्नान के साथ दान और जप भी किया जाए।