सुशांत सिंह राजपूत की कुंडली में पहले से तय थी अकाल मृत्यु? इस ग्रह की दशा बनी मौत का कारण!
SSR Birth Chart: दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु आज भी लोगों के मन में कई सवाल छोड़ जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति उसके जीवन पर प्रभाव डालती है।
- Written By: प्रीति शर्मा
सुशांत सिंह राजपूत की कुंडली का विश्लेषण (सौ. एआई)
Sushant Singh Rajput Horoscope: दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की प्रतिभा का लोहा पूरी दुनिया ने माना लेकिन उनकी अचानक हुई मृत्यु ने कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो उनकी कुंडली में ग्रहों की स्थिति जितनी अद्भुत थी उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी थी। 21 जनवरी 1986 को रात 12:15 बजे पटना में जन्मे सुशांत की लग्न कुंडली तुला और राशि वृषभ थी। कृतिका नक्षत्र में जन्म होने के कारण वे अत्यंत योग्य और दयालु स्वभाव के थे लेकिन यही ग्रह स्थिति उनके जीवन के संघर्ष का कारण भी बनी।
आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा जी से किस ग्रह के कारण सुशांत सिंह राजपूत मौत का शिकार हुए।
योग और करियर की ऊंचाइयां
सुशांत की कुंडली में गुरु (बृहस्पति) और शुक्र की युति ने गजलक्ष्मी योग का निर्माण किया था। इसी योग के कारण उन्हें फिल्म जगत में अपार प्रतिष्ठा, धन, आलीशान मकान और लग्जरी वाहनों का सुख प्राप्त हुआ। कुंडली के चतुर्थ भाव में शक्तिशाली योगों के कारण उन्हें पारिवारिक संपत्ति और विवेक का आशीर्वाद मिला। तुला लग्न के स्वामी शुक्र और गुरु के प्रभाव ने उन्हें कला और अभिनय की दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई। हालांकि मंगल का प्रभाव उन्हें विज्ञान और इंजीनियरिंग की ओर भी ले गया लेकिन शुक्र की प्रबलता ने उन्हें अंततः बॉलीवुड का सितारा बनाया।
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मानसिक संघर्ष
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सुशांत की कुंडली में शनि और चंद्रमा का एक-दूसरे पर दृष्टि डालना शुभ नहीं माना जाता। चंद्रमा वृषभ राशि में उच्च का होकर अष्टम भाव (मृत्यु और रहस्य का भाव) में विराजमान था। अष्टम भाव का चंद्रमा व्यक्ति को बहुत गहरी सोच और शोध (Research) की प्रवृत्ति तो देता है, लेकिन यह मानसिक अशांति और शत्रुओं द्वारा परेशानी का योग भी बनाता है। शनि की पूर्ण दृष्टि चंद्रमा पर होने के कारण उनकी निर्णय लेने की क्षमता कभी-कभी कमजोर हो जाती थी, जिससे वे मानसिक द्वंद्व में फंस जाते थे।
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सुशांत सिंह राजपूत (सौ. सोशल मीडिया)
राहु की महादशा
सुशांत सिंह राजपूत की कुंडली में 21 फरवरी 2004 से राहु की महादशा शुरू हुई थी जो 18 वर्षों तक चलनी थी। राहु सातवें भाव में स्थित था जो सफलता के साथ-साथ मन में अनजाना डर भी पैदा करता है। 27 मार्च 2009 से 02 अगस्त 2019 तक का समय उनके लिए स्वर्णिम रहा जिसमें उन्होंने ऊंचाइयों को छुआ।
विनाशकारी मोड़ तब आया जब 02 अगस्त 2019 से राहु की महादशा में चंद्रमा की अंतर्दशा शुरू हुई। ज्योतिष के अनुसार राहु और चंद्रमा का यह मेल विष योग के समान प्रभाव देता है। अष्टम भाव का चंद्रमा जब राहु के प्रभाव में आता है तो व्यक्ति घोर अवसाद (Depression) और आत्मघाती विचारों का शिकार हो जाता है। यही वह अवधि थी जब सुशांत मानसिक रूप से बेहद कमजोर हो गए और अंततः 14 जून 2020 को यह महान कलाकार मौत का शिकार हो गया।
क्या सुशांत का करियर लंबा हो सकता था?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुशांत को सही समय पर ज्योतिषीय परामर्श और अष्टम चंद्रमा व राहु की शांति के उपाय मिलते, तो यह स्थिति टाली जा सकती थी। चंद्रमा को मजबूत करने के लिए आध्यात्मिक उपाय और राहु के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए विशेष अनुष्ठान उनके जीवन की दिशा बदल सकते थे। ग्रहों की यह प्रतिकूल स्थिति ही थी जिसने एक चमकते सितारे को समय से पहले हमसे छीन लिया।
