Grah Gochar 2026: मकर राशि में बनने वाला 'चतुर्ग्रही योग' विश्व के लिए वरदान या अभिशाप? जानें भविष्यवाणी

Astrology Predictions: मकर राशि में ग्रहों का जमावड़ा वैश्विक मंदी और सीमा विवादों का संकेत दे रहा है। क्या भारत इस संकट में मजबूत बनकर उभरेगा? पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।
planetary transit 2026 effects
प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. एआई)
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Planetary Transit 2026: वर्ष 2026 के जनवरी महीने के मध्य से ग्रहों की एक ऐसी अद्भुत चाल शुरू हो रही है, जो पूरी दुनिया को प्रभावित करेगी। ज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार 13 जनवरी 2026 को शुक्र का मकर राशि में प्रवेश होगा जिसके बाद 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में गोचर करेंगे (मकर संक्रांति)। इसी क्रम में 16 जनवरी को मंगल और 17 जनवरी को बुध भी मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इन चार बड़े ग्रहों के एक साथ आने से मकर राशि में 'चतुर्ग्रही योग' का निर्माण होगा।

मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं, जो न्याय के कारक हैं। शनि की राशि में सूर्य का प्रवेश ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बहुत अनुकूल नहीं माना जाता है, क्योंकि सूर्य अग्नि तत्व और शनि वायु तत्व के स्वामी हैं। यह मेल विश्व व्यापार में कठिन परिश्रम और संघर्ष का संकेत दे रहा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापारिक चुनौतियां

शुक्र जब शनि की राशि में गोचर करेंगे, तो वे 'अस्त' अवस्था में होंगे। हालांकि 14 से 16 जनवरी के बीच 'शुक्रादित्य योग' बनेगा, लेकिन शुक्र के अस्त होने के कारण लोगों के स्वभाव में लालच और काम के प्रति असंतोष बढ़ सकता है। ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार, पूर्वी और पश्चिमी देशों के बीच व्यापारिक संधि और कूटनीति प्रभावित होगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी की स्थिति बनी रहेगी। हालांकि इस कठिन समय में भारत का पक्ष मजबूत रहने की संभावना है। भारत अपने आंतरिक कौशल और कूटनीति से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने का सफल प्रयास करेगा। आईटी सेक्टर के लिए समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है लेकिन टेलिकॉम्युनिकेशन के क्षेत्र में नए शोध और बड़ी योजनाएं सफलता की ओर ले जाएंगी।

प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. एआई)
प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. एआई)

युद्ध, संसाधन और रक्षा क्षेत्र की भविष्यवाणी

16 जनवरी को मंगल का मकर राशि में प्रवेश 'रुचक योग' और शनि-मंगल की युति के कारण विशेष फलदायी होगा। मंगल साहस और सेना के नेतृत्व का कारक है। इसके साथ ही 17 जनवरी को बुध के गोचर से सरकार का ध्यान भारी वस्तुओं, खनन और संसाधनों पर केंद्रित होगा। वैश्विक स्तर पर इसका प्रभाव कुछ नकारात्मक हो सकता है, जिससे बाजार में महंगाई बढ़ सकती है।

मिसाइल और रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में देश अपनी ताकत बढ़ाएंगे। गुरु की अतिचारी चाल के कारण कई देशों के बीच आंतरिक कलह और सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव बढ़ने की आशंका है। शक्ति प्रदर्शन की यह स्थिति मार्च 2026 तक बनी रह सकती है जिससे वैश्विक शांति में खलल पड़ने की संभावना है।

कुंभ राशि में ग्रहण योग और चंद्रग्रहण का असर

14 फरवरी 2026 को जब सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे, तो वहां राहु के साथ युति बनाकर 'ग्रहण योग' का निर्माण करेंगे। इसके साथ ही खग्रास चंद्रग्रहण की घटना भी होगी। यह कूटनीतिक रूप से एक बेहद संवेदनशील समय होगा। विदेशों के साथ भारत के संबंध और वैश्विक कूटनीति कमजोर पड़ सकती है। विश्व बाजार मंदी की चपेट में रहेगा और देशों के बीच कटुता बढ़ सकती है। राहु और सूर्य का मेल विवाद, लड़ाई-झगड़े और हथियारों के प्रदर्शन को बढ़ावा दे सकता है। यह समय मानवता के लिए धैर्य और सतर्कता बरतने वाला होगा।

Gen-Z और रोजगार पर ग्रहों की चाल का प्रभाव

इस गोचर का सबसे अधिक प्रभाव युवा पीढ़ी यानी 'Gen-Z' पर पड़ेगा। ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के मुताबिक जो युवा विदेश में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, उनके लिए यह समय अनुकूल रहेगा। हालांकि मेडिकल और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) के क्षेत्र में नौकरी तलाश रहे युवाओं को संघर्ष करना पड़ सकता है। नौकरी के बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

इसके विपरीत जो लोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रेडिंग या आयात-निर्यात से संबंधित कार्यों में संलग्न हैं उन्हें ग्रहों के इस खेल से अच्छा लाभ मिलने की उम्मीद है। ग्रहों की यह स्थिति सिखाती है कि कठिन परिश्रम और सही दिशा में किए गए शोध से ही विकास के द्वार खुलेंगे।

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