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नए साल में ‘इस’ दिन शुरू हो रहा है अर्धकुंभ, उत्तराखंड में होगा 4 शाही समेत 10 मुख्य स्नान

Uttarakhand Kumbh: साल 2027 में होने वाले अर्धकुंभ की तिथियां तय हो गई हैं। हरिद्वार में होने वाला ये भव्य आयोजन 14 जनवरी से शुरू होगा और 20 अप्रैल को खत्म होगा।

  • Written By: सीमा कुमारी
Updated On: Nov 28, 2025 | 03:19 PM

'इस'दिन शुरू हो रहा है अर्धकुंभ(सौ.सोशल मीडिया)

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Ardh Kumbh 2027: उत्तराखंड में 2027 में होने वाले अर्धकुंभ की तिथियां तय हो गई हैं। हरिद्वार में होने वाला ये भव्य आयोजन 14 जनवरी से शुरू होगा और 20 अप्रैल को खत्म होगा। 97 दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में 10 प्रमुख स्नान शामिल हैं। जिसमें पहली बार चार शाही अमृत स्नान भी होंगे, जिसे एक ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है।

कई दिनों से अर्धकुंभ की तिथियों को लेकर असमंजस की स्थिति थी, जिसके बाद आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार डाम कोठी में अखाड़ा प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस बैठक में मेला प्रशासन की ओर से 13 अखाड़ों के दो-दो सचिव या नामित प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

तिथियों की घोषणा के बाद संतों ने कहा कि यह मेला कुंभ की ही तरह दिव्य और भव्य रूप में आयोजित होगा, जिससे हरिद्वार में करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

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संत समाज ने फैसले का स्वागत किया और कहा कि इस बार अर्धकुंभ का आयोजन भी पूर्ण कुंभ जैसी भव्यता और धार्मिक गरिमा के साथ होगा। इस दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

10 प्रमुख स्नान, जिनमें शामिल 4 शाही स्नान

अर्धकुंभ 2027 के लिए प्रशासन ने 10 महत्वपूर्ण स्नान निर्धारित किए हैं, जिनमें 4 शाही स्नान होंगे। यह पहली बार है जब अर्धकुंभ में शाही स्नान का आयोजन किया जाएगा। बैठक में भीड़ नियंत्रण, गंगा घाटों की क्षमता, यातायात प्रबंधन, अस्थायी मार्ग और पार्किंग जैसे मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा हुई।

सभी अखाड़ों की सर्वसम्मति

बैठक के दौरान सभी 13 अखाड़ों ने स्नान तिथियों और व्यवस्थाओं पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि सरकार की तैयारियां परंपरा, आस्था और अर्धकुंभ की गरिमा को ध्यान में रखते हुए की गई हैं।

मेले की अवधि 1 जनवरी से 30 अप्रैल तक

हालांकि अर्धकुंभ आधिकारिक रूप से 14 जनवरी 2027 को शुरू होगा, लेकिन मेले की गतिविधियां और तैयारियाँ 1 जनवरी से 30 अप्रैल तक चलेंगी। इसी अवधि में सभी प्रमुख स्नान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अखाड़ों की पारंपरिक पेशवाई निकाली जाएगी।

यह भी पढ़ें-2026 की मकर संक्रांति की ये है तिथि, स्नान-दान का महात्म्य, सही मुहूर्त और महत्व नोट कर लीजिए

क्या है शाही अमृत स्नान?

शाही अमृत स्नान साधु-संतों और अखाड़ों द्वारा किया जाने वाला एक पवित्र और प्रतिष्ठित स्नान है, जिसकी परंपरा 14वीं–16वीं शताब्दी के बीच विकसित हुई। यह स्नान सम्मान, आस्था और अखाड़ों की ऐतिहासिक भूमिका का प्रतीक है। समय के साथ यह अनुष्ठान धार्मिक गरिमा के साथ-साथ संत समाज के शाही वैभव का भी प्रतीक बन गया।

Ardha kumbha is starting on this day in the new year

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Published On: Nov 28, 2025 | 03:19 PM

Topics:  

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