सांवलिया सेठ को रिकॉर्ड 51 करोड़ रुपए का चढ़ावा, भक्तों ने 1 किलो सोना और 207 किलो चांदी भेंट की
Sanwaliya Seth Temple: चित्तौड़गढ़ के श्रीसांवलियाजी सेठ मंदिर में दान का नया रिकॉर्ड बना। भक्तों ने 51.27 करोड़ रुपए नकद/ऑनलाइन, 1 किलो से ज्यादा सोना और 207 किलो से ज्यादा चाँदी दान की।
- Written By: प्रिया सिंह
चित्तौड़गढ़ का श्रीसांवलियाजी सेठ मंदिर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Sanwaliya Seth Temple Receives Record 51Cr Rupees Donation: चित्तौड़गढ़ (मेवाड़) स्थित भगवान श्रीकृष्ण के धाम श्रीसांवलियाजी सेठ मंदिर को भक्तों ने अपार प्रेम और श्रद्धा अर्पित की है। हाल ही में खोले गए मंदिर के भंडार से प्राप्त दान की गिनती पूरी हो गई है। इस बार दान की राशि ने मंदिर के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यह रिकॉर्ड तोड़ चढ़ावा भक्तों की गहरी आस्था और विश्वास को दर्शाता है।
सांवलिया सेठ के भंडार में रिकॉर्ड तोड़ 51 रुपए करोड़ का चढ़ावा
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित कृष्णधाम श्रीसांवलियाजी सेठ मंदिर के चढ़ावे की गिनती ने इस बार नया कीर्तिमान स्थापित किया है। गुरुवार को छठे और अंतिम चरण की गिनती पूरी होने के बाद, नकद और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की कुल राशि 51 करोड़ 27 लाख 30 हजार 112 रुपए दर्ज की गई। यह मंदिर के इतिहास में पहली बार है जब दान का आंकड़ा 51 करोड़ रुपए को पार कर गया है।
सोना-चांदी भी हुआ भरपूर दान
सिर्फ नकदी ही नहीं, बल्कि भक्तों ने कीमती धातुओं में भी खूब दान किया। चढ़ावे में कुल 207 किलो 793 ग्राम चांदी और 1204 ग्राम 04 मिलीग्राम सोना प्राप्त हुआ है। यह दान मंदिर के भंडार और भेंट कक्ष से इकट्ठा किया गया है। यह दिखाता है कि ऑनलाइन और नकद माध्यमों के साथ-साथ भक्त अपनी श्रद्धा को धातु के रूप में भी व्यक्त कर रहे हैं।
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19 नवंबर को खुला भंडार, उत्साह रहा चरम पर
श्रीसांवलियाजी मंदिर का भंडार 19 नवंबर को खोला गया था। इसके बाद लगातार कई दिनों तक प्रशासन, ट्रस्ट और सुरक्षा व्यवस्था की कड़ी निगरानी में नोटों, सिक्कों और पर्चियों की गिनती की गई। भंडार खुलने की खबर से ही भक्तों में भारी उत्साह देखा गया और मंदिर परिसर में पूरे समय श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही।
गिनती में ऐसे बना रिकॉर्ड
दान की गिनती को छह चरणों में पूरा किया गया, जिसमें हर चरण में करोड़ों रुपए निकले-
- पहला चरण: 19 नवंबर को हुई गिनती में 12 करोड़ 35 लाख रुपए की बड़ी राशि प्राप्त हुई।
- दूसरा चरण: 21 नवंबर को (अमावस्या के बाद) 8 करोड़ 54 लाख रुपए निकले।
- तीसरा चरण: 24 नवंबर को 7 करोड़ 8 लाख 80 हजार रुपए का दान मिला।
- चौथा चरण: इसमें 8 करोड़ 15 लाख 80 हजार रुपए की राशि निकली, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि इस बार रिकॉर्ड बनना तय है।
- पांचवां चरण: 26 नवंबर को 4 करोड़ 19 लाख 79 हजार रुपए जोड़े गए, जिसके बाद कुल राशि 40 करोड़ के पार पहुंच गई।
- छठा (अंतिम) चरण: अंतिम चरण में 41 लाख 01 हजार 543 रुपए प्राप्त हुए, जिसने कुल राशि को 51 करोड़ के पार पहुंचा दिया।
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मंदिर मंडल के सदस्यों के अनुसार, श्रद्धालुओं का भगवान के प्रति बढ़ता विश्वास ही इस ऐतिहासिक उपलब्धि की सबसे बड़ी वजह है।
