समुद्र के तट पर विराजमान है 123 फीट के भगवान शिव, यहां रावण ने पाया वरदान और श्रीगणेश ने बदली कहानी
Murudeshwar Shiva Temple: शिव मंदिरों में से एक कर्नाटक में स्थित मुरुदेश्वर शिव मंदिर की बात ही निराली है। इस मंदिर की खासियत है कि, अरब सागर के किनारे विराजमान भगवान शिव के चरणों को समुद्र की लहरें छूती है।
- Written By: दीपिका पाल
Murudeshwar Shiva Temple: भारत और दुनियाभर में वैसे तो कई शिव मंदिर है जो विशेष महत्व रखते है। यहां पर दुनिया के हर कोने में भगवान शिव का मंदिर देखने को मिल जाएगा और उनकी अराधना करने वाले भक्तों की कमी भी नहीं है। शिव मंदिरों में से एक कर्नाटक में स्थित मुरुदेश्वर शिव मंदिर की बात ही निराली है। इस मंदिर की खासियत है कि, अरब सागर के किनारे विराजमान भगवान शिव के चरणों को समुद्र की लहरें छूती है।
यह खास मंदिर कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में समुद्र के किनारे 'कंदुका गिरि' पहाड़ी पर स्थित है। यह विश्व की दूसरी ऐसी शिव प्रतिमा है, जिसकी ऊंचाई 123 फुट है। इस मंदिर का इतिहास और वास्तुकला देखते ही बनती है। समुद्र की लहरें जब भी उठती हैं, भगवान शिव के चरणों को छूकर जाती हैं। इसकी भव्यता के कारण यह देश के लोकप्रिय तीर्थस्थलों और पर्यटन स्थलों में से एक है।
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इस मंदिर में प्रतिमा के दर्शन करने से पहले भक्त मूल मंदिर में दर्शन करते है। मुरूदेश्वर शिव मंदिर में स्थित गोपुरम बेहद खास है। यह 20 मंजिला है, जिसमें महाभारत, रामायण के पात्र और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा को पत्थर पर उकेरा गया है। मंदिर ग्रेनाइट से बना है और मंदिर की वास्तुकला द्रविड़ स्थापत्य शैली, चालुक्य और कदंब राजवंश को दर्शाती है। इसके अलावा इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिवलिंग के स्वरूप की पूजा की जाती है।
इस मंदिर की पौराणिक कथा प्रचलित है जो रावण और भगवान शिव से जुड़ी है। इसे लेकर कहा जाता है कि, रावण ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी और भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें आत्मलिंग दिया था। रावण के अहंकार को तोड़ने के लिए भगवान शिव ने कहा था कि इस शिवलिंग को जमीन पर नहीं रखना है, अगर ऐसा हुआ तो, वे वहीं स्थापित हो जाएंगे। आत्मलिंग को लंका जाने से रोकने के लिए भगवान गणेश ने रावण के साथ छल किया और शिवलिंग 'कंदुका गिरि' पर स्थापित हुआ।
इस मंदिर में सबसे अच्छा नजारा सावन के महीने में होता है। यहां पर मुरुदेश्वर शिव मंदिर में सावन के महीने में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। वहीं पर सावन के महीने में इस आत्मलिंग के दर्शन के लिए भक्त दूर-दूर से आते है।
यहां पर पूजा करने आने वाले भक्त महिलाएं हो या पुरूष दोनों ही भारतीय परिधान में पूजा-अर्चना करते है। मंदिर में दर्शन के बाद पहाड़ी पर विराजमान भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस मंदिर के दर्शन करने के लिए दुनियाभर से लोग आते है।
