बसंत पंचमी (सौ.सोशल मीडिया)
Basant Panchami Marriage:23 जनवरी को बसंत पंचमी का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह शुभ एवं पवित्र तिथि मां सरस्वती को समर्पित होती है। ज्ञान, कला और संगीत से जुड़े लोगों के लिए यह त्योहार किसी उत्सव से कम नहीं होता। आम तौर पर इस दिन लोग नए काम शुरू करते हैं, घर में पूजा करते हैं, और सबसे बड़ी बात यह है कि मांगलिक काम जैसे विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसी रस्में भी बहुत शुभ मानी जाती हैं।
लेकिन, ज्योतिषयों के अनुसार, इस साल 23 जनवरी को आने वाली बसंत पंचमी पर ऐसा नहीं होगा। इस साल इस दिन विवाह का कोई शुभ मुहूर्त नहीं बन रहा है।
धर्मशास्त्र में बताया गया है कि, जब शुक्र या गुरु का तारा अस्त हो जाता है, तो शादी या किसी भी मांगलिक काम के लिए समय अनुकूल नहीं माना जाता। इस साल बसंत पंचमी के दिन चंद्रमा मीन राशि में रहेगा, और उसके साथ पूर्व भाद्रपद नक्षत्र और परिघ योग जुड़ा हुआ है।
इन सभी ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति की वजह से यह दिन विवाह जैसे बड़े काम के लिए शुभ नहीं माना जा रहा है। इसलिए जो लोग इस दिन शादी या गृह प्रवेश करने की सोच रहे थे, उन्हें थोड़ा इंतजार करना होगा। पूरे भारत में लोग बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त मानकर मांगलिक कार्य करते आए हैं, लेकिन इस बार परिस्थितियां बिलकुल अलग हैं।
हर वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसी दिन खटवांग जयंती और तक्षक पंचमी का भी संयोग बनता है। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है। लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं, पीले फूल अर्पित करते हैं और मां सरस्वती को बूंदी के लड्डू, मालपुआ, खीर तथा पीले चावल जैसे व्यंजन भोग में चढ़ाते हैं।
बसंत पंचमी के साथ ही कई मंदिरों में फाग महोत्सव की शुरुआत भी होती है, जहां भगवान को गुलाल अर्पित किया जाता है। ये सभी परंपराएं बसंत ऋतु के आगमन और विद्या, बुद्धि एवं कला की देवी मां सरस्वती की आराधना का प्रतीक मानी जाती हैं।
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हालांकि इस वर्ष बसंत पंचमी के दिन विवाह और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं हैं, फिर भी यह दिन पूजा-पाठ, ज्ञान साधना, शिक्षा और कला-संगीत से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस वर्ष ज्येष्ठ मास में अधिक मास का संयोग 17 मई से 15 जून तक रहेगा। अधिक मास के दौरान विवाह और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। इसके पश्चात जब शुद्ध ज्येष्ठ मास आरंभ होगा, तब ही विवाह के लिए शुभ योग बनेंगे।