राजस्थान हाईकोर्ट।
Rajasthan Hijab Case News : राजस्थान में एक प्रतियोगी परीक्षा के दौरान छात्रा को हिजाब पहनने के कारण परीक्षा केंद्र में प्रवेश न देने का मामला अब कानूनी गलियारों में गूंज रहा है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में पूछा है कि आखिर किस आधार पर एक छात्रा को उसके भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा से वंचित कर दिया गया?
मामला वर्ष 2025 में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित एक प्रतियोगी परीक्षा का है। याचिकाकर्ता छात्रा का तर्क है कि वह निर्धारित समय पर, वैध एडमिट कार्ड और पहचान पत्रों के साथ केंद्र पहुंची थी। सुरक्षा जांच के दौरान उसका चेहरा पूरी तरह स्पष्ट था और पहचान सुनिश्चित करने में कोई तकनीकी बाधा नहीं थी। इसके बावजूद वहां मौजूद अधिकारियों ने ड्रेस कोड का हवाला देते हुए उसे हिजाब उतारने को कहा और मना करने पर उसे परीक्षा में बैठने ही नहीं दिया।
छात्रा ने अपनी याचिका में न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि परीक्षा न दे पाने के कारण उसने सरकारी नौकरी का एक बहुमूल्य अवसर खो दिया है, जिसकी भरपाई नामुमकिन है। उसके वकीलों ने तर्क दिया कि यह न केवल संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है, बल्कि अनुच्छेद 25 के तहत मिली धार्मिक स्वतंत्रता पर भी प्रहार है। याचिका में मांग की गई है कि छात्रा के लिए विशेष रूप से दोबारा परीक्षा आयोजित की जाए।
सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि हिजाब केवल सिर ढकने का एक वस्त्र है, इससे सुरक्षा व्यवस्था या अभ्यर्थी की पहचान को कोई खतरा नहीं होता। कोर्ट ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि नियमों की गलत व्याख्या करके किसी छात्र का भविष्य खराब किया गया है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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कोर्ट ने अब राज्य सरकार और संबंधित परीक्षा बोर्ड से विस्तृत जवाब मांगा है। यह मामला अब केवल एक छात्रा का नहीं, बल्कि उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए मिसाल बनेगा जो अपनी धार्मिक मान्यताओं और करियर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अगली सुनवाई में यह तय होगा कि क्या प्रशासन अपनी सख्ती को सही साबित कर पाएगा या छात्रा को न्याय मिलेगा।