‘फिर तो पूरा जयपुर आपका हो जाएगा?’ राजघराने के टाउन हॉल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी; जानें क्या है पूरा मामला
जयपुर टाउन हॉल को म्यूजियम बनाने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस तो जारी किया, लेकिन हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। बता दें कि यह मामला गहलोत सरकार से जुड़ा है।
- Written By: सौरभ शर्मा
जयपुर टाउन हॉल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी (फोटो- सोशल मीडिया)
जयपुर: राजस्थान के जयपुर के ऐतिहासिक टाउन हॉल को लेकर उठे संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी ने हलचल मचा दी है। राजस्थान सरकार और शाही परिवार के बीच चल रहे इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जब पूछा कि “ऐसे तो पूरा जयपुर आपका हो जाएगा?”, तो कोर्ट का रुख और मामला दोनों ही गंभीर हो गए। जयपुर राजघराने ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जहां कोर्ट ने फिलहाल राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगाने के संकेत दिए हैं। अब यह मामला गहराई से जांचा जाएगा।
इस पूरे विवाद की जड़ 1949 में हुए उस समझौते में है, जिसमें टाउन हॉल जैसी संपत्तियां सरकार को सरकारी उपयोग के लिए दी गई थीं। लेकिन जब हाल ही में इन स्थलों को म्यूजियम में बदलने की योजना बनी, तो शाही परिवार ने इसे समझौते का उल्लंघन बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। अब सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि क्या अनुच्छेद 363 इस पर लागू होता है या फिर यह शाही परिवार के संपत्ति अधिकारों का हनन है।
संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी
जयपुर टाउन हॉल को लेकर राजघराने की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर हर रियासत इसी तरह का दावा करने लगे तो क्या पूरे राजस्थान की सरकारी संपत्तियां रजवाड़ों की हो जाएंगी? कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह मामले के मेरिट पर नहीं जा रहा, लेकिन इस कानूनी बहस को लेकर चिंतित जरूर है।
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राजस्थान सरकार को मिली फटकार, सुनवाई टली
राजघराने के वकील ने संविधान के अनुच्छेद 362 और 363 का हवाला देते हुए संपत्ति पर दावा जताया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि अगर भारत सरकार इस संधि का पक्ष नहीं थी तो अनुच्छेद 363 लागू नहीं होगा। साथ ही राज्य सरकार से कहा गया कि जब तक यह मामला लंबित है, वह कोई भी कार्रवाई आगे न बढ़ाए। अब दो महीने बाद फिर इस मामले पर सुनवाई होगी और तब तय होगा कि शाही परिवार का दावा कितना मजबूत है।
