पचपदरा रिफाइनरी में आग का ‘खतरनाक’ सच आया सामने! HPCL के खुलासे ने सबको चौंकाया
Pachpadra Refinery Fire: पचपदरा रिफाइनरी में आग क्यों लगी? HPCL ने एक रिपोर्ट जारी कर आग के कारण को स्पष्ट किया। साथ ही उन्होंने रिफाइनरी की मरम्मत की अपडेट दी।
- Written By: प्रिया जैस
पचपदरा रिफाइनरी आग (सौजन्य- सोशल मीडिया)
Pachpadra Refinery Fire Report: राजस्थान के पचपदरा रिफाइनरी में लगी आग के असली कारणों का खुलासा हो गया है। रिफाइनरी (Pachpadra Refinery) में लगी आग को लेकर हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने प्रारंभिक जांच के आधार पर बड़ा खुलासा किया है। कंपनी के मुताबिक, आग की संभावित वजह क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट में लगे प्रेशर गेज के पास हुआ रिसाव था।
करीब 79,450 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस रिफाइनरी में 20 अप्रैल को आग लगी थी। यह घटना उस समय हुई, जब एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों इसके उद्घाटन की तैयारी थी। आग मुख्य रूप से क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट में लगी, जहां शुरुआती तौर पर हीट एक्सचेंजर सर्किट में वाल्व या फ्लैंज से हाइड्रोकार्बन लीक होने की आशंका जताई गई थी।
HPCL ने दी जानकारी
कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि विस्तृत जांच में सामने आया है कि आग सीमित दायरे में ही रही और हीट एक्सचेंजर स्टैक तक ही फैली। इस घटना में छह हीट एक्सचेंजर और उनसे जुड़े उपकरण प्रभावित हुए हैं।
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HPCL के अनुसार, उपलब्ध सबूतों और साइट की स्थिति को देखते हुए यह माना जा रहा है कि वैक्यूम रेजिड्यू एक्सचेंजर की इनलेट लाइन पर लगे प्रेशर गेज से रिसाव हुआ, जिसने आग को जन्म दिया। फिलहाल मरम्मत का काम तेजी से जारी है और अगले तीन से चार हफ्तों में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी को उम्मीद है कि मई 2026 के दूसरे पखवाड़े में क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट दोबारा चालू कर दी जाएगी।
कंपनी ने यह भी साफ किया है कि पचपदरा रिफाइनरी की अन्य सेकेंडरी यूनिट्स का काम अंतिम चरण में है और तय योजना के अनुसार आगे बढ़ रहा है। एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और नेफ्था जैसे ईंधनों का ट्रायल प्रोडक्शन मई के भीतर शुरू होने की संभावना है, जिसके बाद यूनिट्स को पूरी क्षमता पर लाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन टला
इस घटना के चलते 21 अप्रैल को प्रस्तावित उद्घाटन कार्यक्रम को फिलहाल टाल दिया गया है। नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी। वहीं, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मामले की अलग से जांच शुरू कर दी है। इसके लिए एम. वैंकटेश की अगुवाई में चार सदस्यीय समिति गठित की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, रिफाइनरियों में कमीशनिंग और स्टार्टअप के दौरान इस तरह की घटनाओं का खतरा ज्यादा रहता है, क्योंकि इसी समय हाई-प्रेशर और हाई-टेम्परेचर सिस्टम में हाइड्रोकार्बन डाले जाते हैं।
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गौरतलब है कि यह रिफाइनरी देश की 24वीं और सबसे जटिल रिफाइनरियों में से एक मानी जा रही है। बालोतरा जिले में बन रहा यह रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स 90 लाख टन सालाना क्षमता का होगा। इसमें पेट्रोकेमिकल उत्पादन पर विशेष फोकस रखा गया है, जिससे भारत की आयात निर्भरता कम करने और वैल्यू-एडेड उत्पादन बढ़ाने की रणनीति को मजबूती मिलेगी।
पूरी तरह चालू होने के बाद यहां पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीएथिलीन, बेंजीन और ब्यूटाडाइन जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक रसायनों का उत्पादन भी किया जाएगा, जिनका इस्तेमाल परिवहन, पैकेजिंग, दवा और निर्माण जैसे कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर होता है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
