'शौर्य दिवस' पर राजस्थान सरकार का यू-टर्न
Rajasthan Govt U-turn on Shaurya Diwas controversy: राजस्थान की राजनीति में 6 दिसंबर की तारीख को लेकर भारी उथल-पुथल मची हुई है। भजनलाल सरकार ने स्कूलों में बाबरी मस्जिद विध्वंस को ‘शौर्य दिवस’ के रूप में मनाने के अपने ही फैसले पर अचानक यू-टर्न ले लिया है। पहले जहां शिक्षा मंत्री इसे गर्व का विषय बता रहे थे, वहीं अब विभाग ने ऐसी किसी भी योजना से साफ इनकार कर दिया है। सरकार के इस पलटीमार रवैये ने विपक्ष को बैठे-बिठाए हमला करने का एक बड़ा मुद्दा दे दिया है।
विवाद की शुरुआत 22 अक्टूबर 2025 के एक सरकारी पत्र से हुई थी। बीकानेर के माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा जारी इस सर्कुलर में सभी सरकारी और निजी स्कूलों को 6 दिसंबर को शौर्य दिवस मनाने का निर्देश दिया गया था। इसमें निबंध, भाषण, नाटकों और राम मंदिर आंदोलन पर प्रदर्शनी लगाने की बात कही गई थी। छात्रों को देश की संस्कृति और राम मंदिर को राष्ट्रीय गौरव मानने की शपथ दिलाने के साथ सूर्य नमस्कार और योग जैसी प्रेरणादायी गतिविधियों का आयोजन भी प्रस्तावित था।
इस पूरे मामले पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मीडिया से खास बातचीत में अपने फैसले का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि हम इसे बाबरी ध्वंस नहीं, बल्कि शौर्य दिवस कहेंगे क्योंकि विवादित ढांचा गिराना कारसेवकों का एक साहसिक कार्य था। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में बलिदान देने वालों को याद करने की बात कही थी। लेकिन 30 नवंबर को अचानक कहानी बदल गई। निदेशक सीताराम जाट ने एक नया आदेश जारी कर शौर्य दिवस की खबरों को गलत और भ्रामक बता दिया। सूत्रों के अनुसार, यह यू-टर्न मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद लिया गया है क्योंकि आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को देखते हुए भाजपा इस विवाद से बचना चाहती है।
यह भी पढ़ें: चुनाव जीत जाएंगे, लेकिन देश का भविष्य? मुफ्त की रेवड़ी पर RBI के पूर्व गवर्नर की चेतावनी
सरकार के इस असमंजस पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता प्रताप सिंह खाचरियावास ने तंज कसते हुए कहा कि शिक्षा विभाग अपने ही मंत्री और आदेशों का मजाक बना रहा है। उन्होंने कहा कि यह सरकार केवल यू-टर्न लेने और ऊपर से डांट पड़ने पर फैसले वापस लेने के लिए जानी जाती है। खाचरियावास ने शिक्षा मंत्री से सवाल किया कि आखिर विभाग में चल क्या रहा है। फिलहाल, भाजपा के लिए यह स्थिति असहज बन गई है, क्योंकि एक तरफ उनका कोर वोट बैंक है और दूसरी तरफ चुनावों का सियासी गणित।