सुनेत्रा पवार, मुख्यमंत्री फडणवीस
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष और एनसीपी नेता रूपाली चाकणकर ने इस्तीफा दे दिया है। उनका यह कदम उनके आध्यात्मिक गुरु और स्वयंभू बाबा अशोक खरात पर बलात्कार के एक मामले में गिरफ्तारी के बाद आया। महायुति सरकार के सत्ता में आने के 15 महीने से भी कम समय में यह पार्टी का तीसरा बड़ा इस्तीफा है। इस घटना ने पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी नेतृत्व की कमजोरी को भी उजागर किया है।
राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री और पार्टी की वर्तमान प्रमुख सुनेत्रा पवार ने रूपाली के इस्तीफे पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की। उन्होंने न तो उन्हें फटकारा और न ही कोई त्वरित कार्रवाई की। इससे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एनसीपी के आंतरिक मामलों में अपनी पकड़ दिखाने का अवसर मिला। यह इस साल की दूसरी ऐसी घटना है, जब फडणवीस ने प्रभावी ढंग से किसी एनसीपी पदाधिकारी के इस्तीफे को तय किया।
इससे पहले मार्च 2025 में मंत्री धनंजय मुंडे से इस्तीफा लिया गया, जब उनके सहयोगी वाल्मीकि कराड का नाम बीड जिले में सरपंच संतोष देशमुख की हत्या के मामले में सामने आया था। इसके बाद दिसंबर 2025 में एनसीपी के मंत्री माणिकराव कोकाटे को नासिक अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के एक दिन बाद इस्तीफा देना पड़ा। उन्हें सरकारी फ्लैट के लिए दस्तावेजों में हेरफेर करने और 1995 के भूमि विवाद मामले में दोषी ठहराया गया था।
एनसीपी के मंत्री नरहरि ज़िरवाल भी जांच के दायरे में हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने उनके मंत्रालय के कार्यालय में रिश्वत के आरोपों के चलते छापा मारा। उनके एक कर्मचारी की गिरफ्तारी और प्रशासनिक प्रमुख का तबादला होने के बाद ज़िरवाल ने सार्वजनिक सक्रियता कम कर दी है।
रूपाली चाकणकर के इस्तीफे ने सुनेत्रा पवार की प्रभावशीलता पर संदेह पैदा किया है। उन्होंने केवल इस्तीफे की पुष्टि की, जबकि इस मामले में यौन उत्पीड़न से जुड़े आरोपों के बीच उन्हें कार्रवाई का अवसर था। इसके बावजूद रूपाली अभी भी एनसीपी की राज्य महिला विंग की अध्यक्ष बनी हुई हैं और उनके खिलाफ कोई अंदरूनी कार्रवाई नहीं हुई।
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प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने इस मुद्दे पर शुरुआत में चुप्पी बरती और बाद में सोशल मीडिया के माध्यम से निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने संभावित कार्रवाई का संकेत दिया। इस स्थिति से साफ है कि अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने पार्टी की कमान संभाली है, लेकिन अभी भी आंतरिक मामलों पर पूरी पकड़ बनाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।