क्यों 21 जून को कहते हैं साल का सबसे लंबा दिन, आज छोटी होती है रात, जानिए साइंस में इसका फैक्ट
आज 21 जून का दिन कई मायनों में बेहद खास है जहां पर साल का सबसे बड़ा दिन होता है इसमें रात छोटी होती है तो दिन बड़ा होता है। इसे विज्ञान की भाषा में ग्रीष्म संक्रांति कहा जाता है। आज सू्र्य काफी ऊंचाई पर नजर आता है।
- Written By: दीपिका पाल
आज 21 जून का दिन कई मायनों में बेहद खास है जहां पर साल का सबसे बड़ा दिन होता है इसमें रात छोटी होती है तो दिन बड़ा होता है। इसे विज्ञान की भाषा में ग्रीष्म संक्रांति कहा जाता है जो हर साल आमतौर पर 20 से 22 जून के बीच पड़ती है। इस प्रकार 21 जून का दिन क्यों लंबा माना जाता है चलिए जानते है विज्ञान के अंतर्गत।
इसे भौगोलिक आधार पर समझें तो, पृथ्वी अपने अक्ष और सूर्य की कक्षा में परिक्रमा करती है परिक्रमा के दौरान 21 जून को दोपहर में ऐसी स्थिति बनती है, जब सूर्य कर्क रेखा के ऊपर होता है जिस वजह से सूर्य का प्रकाश दोपहर के समय 21 जून को धरती पर सबसे लंबे समय तक रहता है। इस दिन पृथ्वी पर दिन सुबह जल्दी होता और सूर्यास्त देर से होता है, जिस कारण 21 जून सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है।
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विज्ञान में इस दिन को जानें तो, सूर्य की किरणें अपने समय से एक घंटा ज्यादा देर तक धरती पर रहती है। यानि कि, सूर्य की किरणें 12 घंटे के मुकाबले धरती पर लगभग 15 से 16 घंटे तक रहती हैं।
इसे पृथ्वी की सामान्य प्रक्रिया मानी जाती हैं जो पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाने के साथ अपने अक्ष पर भी घूमती है। वह अपने अक्ष में 23.5 डिग्री झुक जाती हैं , इसकी वजह से सूरज की रोशनी धरती पर हमेशा एक जैसी नहीं पड़ती और दिन रात की अवधि में अंतर आता है।
जब पृथ्वी घूमती है और सूरज की तरफ आप होते हैं, तो आपको दिन दिखता है, जबकि जिन स्थानों पर पृथ्वी का दूसरा हिस्सा होता है, वहां रात होती है। यह स्थिति अमेरिका या विदेशी क्षेत्रों में दिखती हैं। इसके विपरित बता दें सूर्य का एक चक्कर पूरा लगाने में उसे 365 दिन लगता है।
साल में दो बार ऐसी स्थिती होती है जब पृथ्वी की धुरी न तो सूर्य की ओर झुकी होती है और न ही सूर्य से दूर, जिसके वजह से उस दिन समान अवधि के दिन और रात होते हैं। ऐसा 21 मार्च (वर्नल विषुव) और 22 सितंबर (शरद ऋतु विषुव) के करीब घटित होता है।
