मेजी जलाने का अर्थ- इस खास माघ बिहू के मौके पर लोग मेजी जलाकर लोग चावल, दालें, घी और पीठा को सूर्य की आराधना हेतु अग्नि में अर्पित किया जाता है। मेजी का जलना अंधकार पर प्रकाश की और मृत्यु पर जीवन की विजय का प्रतीक है। असम के कुछ जातीय समुदाय जैसे सोनोवाल, कछारी, दिमासा और राभा, मेजी के जलने को पूर्वजों की पूजा से जोड़ते हैं। माना जाता है कि इच्छाधारी मृत्यु का वरदान पाकर भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण में पारगमन के बाद ही अपने नश्वर शरीर को त्यागने का निर्णय लिया था। जैसे-जैसे लपटें मेजी को घेरती हैं, वैसे-वैसे लोग यह कहना शुरू कर देते हैं, 'पूह गोल माघ होल, अमर मेजी जोली गोल।'