तीन सूंड धारी, मोर की सवारी वाले गणपति बप्पा क्या आपने देखें, महाराष्ट्र में यहां स्थित है मंदिर

Trishunda Ganapati Temple: गणेशजी के वैसे तो अनोखे मंदिर है लेकिन पुणे में एक मंदिर त्रिशुंड गणपति मंदिर है जो अपने आप में खासियत रखता है। ये मंदिर भी भक्तों के बीच अपनी अद्भुत मान्यता के कारण जाना जाता है।
त्रिशुंड मयूरेश्वर गणपति मंदिर
त्रिशुंड मयूरेश्वर गणपति मंदिर (सौ. सोशल मीडिया)
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जानिए त्रिशुंड गणपति मंदिर की खासियत
Ganesha Temple in Pune: गणेश उत्सव का दौर चल रहा है इस दौर में प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश की पूजा की जा रही है। घरों और पंडालों में स्थापित गणेश जी की पूजा की जाती है औऱ रोजाना 10 दिनों के उत्सव में गणेश जी के पसंदीदा भोग लगाए जाते है। गणेशजी के वैसे तो अनोखे मंदिर है लेकिन पुणे में एक मंदिर त्रिशुंड गणपति मंदिर है जो अपने आप में खासियत रखता है।
जानिए त्रिशुंड गणपति मंदिर की खासियत
यह गणेश मंदिर महाराष्ट्र के पुणे में स्थित है जिसका नाम त्रिशुंड गणपति मंदिर है। कहा जाता है कि, इस मंदिर में स्थापित गणेशजी की मूर्ति के तीन सूंड है।त्रिशुंड गणपति जिन्हें त्रिशुंड विनायक भी कहा जाता है, का इतिहास लगभग एक हजार साल पुराना माना जाता है।
जानिए त्रिशुंड गणपति मंदिर की खासियत
बताया जाता है कि, इस त्रिशुंड मयूरेश्वर गणपति मंदिर का निर्माण काफी पुराना है जो अब तक परंपरा को समेटे हुए है। इस मंदिर का निर्माण 26 अगस्त 1754 को धामपुर (इंदौर के पास) के भिक्षुगिरि गोसावी ने शुरू किया था और ये 1770 में पूरा हुआ। बताया जाता है कि, सोमवार पेठ की व्यस्त गलियों में कमला नेहरू अस्पताल चौक के पास है। मंदिर का सीधा रास्ता नागजरी नदी की धारा तक जाता है।
जानिए त्रिशुंड गणपति मंदिर की खासियत
इस मंदिर में स्थापित गणेशजी की प्रतिमा की खासियत बेहद अनोखी है। बताया जाता है कि, प्रतिमा तीन आंखों वाली और छ‍ह भुजाओं वाली है। खास‍ियत ये है क‍ि बप्‍पा अपने वाहन चूहे पर नहीं, बल्कि एक मोर पर सवार हैं। ये मूर्ति कीमती रत्नों से सजी है। जो भी को इस मूर्ति को देखता है बस देखता ही रह जाता है।
जानिए त्रिशुंड गणपति मंदिर की खासियत
मंदिर का सामने वाला हिस्सा कमाल की नक्काशी से भरा है, जिसमें देवी-देवताओं, जानवरों और पुरानी कहानियों के पात्रों की मूर्तियां बनी हैं। इनमें कुछ खास तस्वीरें भी हैं, जैसे एक ब्रिटिश सैनिक ने गैंडे को बांध रखा है। ऐसा माना जाता है कि ये नक्काशी 1757 में हुई प्लासी की लड़ाई के बाद बंगाल और असम पर अंग्रेजों की जीत को दिखाती है।
जानिए त्रिशुंड गणपति मंदिर की खासियत
त्रिशुंड गणपति मंदिर खासतौर पर गणेश चतुर्थी और गुरु पूर्णिमा पर जगमगा उठता है। इन खास मौकों पर भजन-कीर्तन, ढोल-ताशे और भक्तों की सामूहिक प्रार्थना पूरे वातावरण को दिव्यता से भर देते हैं।

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