भूपेन कुमार बोरा। इमेज-सोशल मीडिया
Bhupen Kumar Borah Resigns From Congress : असम में विधानसभा चुनावों की आहट के बीच कांग्रेस के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने सोमवार सुबह अपने पद और पार्टी से इस्तीफा देकर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। करीब 32 सालों तक कांग्रेस के प्रति निष्ठा रखने वाले बोरा ने अपना त्यागपत्र राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को भेज दिया है।
गुवाहाटी में अपने आवास के बाहर मीडिया से मुखातिब होते हुए बोरा भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि मैंने सुबह 8 बजे अपना इस्तीफा भेज दिया है। फिलहाल मैं पार्टी हाईकमान की प्रतिक्रिया का इंतजार करूंगा, इसलिए विस्तृत टिप्पणी नहीं करना चाहता। मगर, इतना तय है कि मैं सक्रिय राजनीति में बना रहूंगा।
बोरा ने संकेतों में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि तीन दशकों की समर्पित सेवा के बावजूद हालिया परिस्थितियों ने उन्हें यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर किया। गौरतलब है कि अगस्त 2021 में जिम्मेदारी संभालने वाले बोरा को मई 2024 में अध्यक्ष पद से हटाकर गौरव गोगोई को कमान सौंप दी गई थी, तभी से उनके असंतोष की खबरें आ रही थीं।
इस इस्तीफे पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सरमा ने इसे प्रत्याशित बताते हुए कहा कि बोरा को अध्यक्ष पद से हटाना ही इस बात का सबूत था कि कांग्रेस में उनका कद छोटा किया जा रहा है। सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि भूपेन बोरा असम कांग्रेस के आखिरी हिंदू नेता थे। उनका जाना यह संदेश देता है कि कांग्रेस में एक सामान्य परिवार का व्यक्ति आगे नहीं बढ़ सकता। सरमा ने यहां तक संकेत दे दिए कि बोरा भाजपा में आते हैं तो पार्टी उन्हें आगामी चुनाव में टिकट देने पर विचार कर सकती है।
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असम में मार्च-अप्रैल में चुनाव होने की संभावना है। ऐसे नाजुक वक्त में एक पुराने दिग्गज का साथ छोड़ना कांग्रेस की चुनावी तैयारियों और विपक्षी गठबंधन की संभावनाओं को तगड़ा झटका दे सकता है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देबब्रता सैकिया ने कहा कि वे इस खबर से स्तब्ध हैं और बोरा से व्यक्तिगत रूप से बात करने के बाद ही कोई बयान देंगे।