मांगें पूरी हुईं, अब केस भी वापस हों, मुंबई में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के समर्थन में उतरे जीशान सिद्दीकी
Mumbai Students Protest: NCP नेता जीशान सिद्दीकी ने सीएम देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि केस रद्द किए जाने चाहिए।
- Written By: गोरक्ष पोफली
जीशान सिद्दीकी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Zeeshan Siddique Demands Withdrawal Of FIR: महाराष्ट्र राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता और विधान परिषद सदस्य जीशान सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर राज्यभर में विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग की है।
जीशान सिद्दीकी ने कहा कि छात्रों की प्रमुख चिंताओं का समाधान हो चुका है, इसलिए उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई समाप्त करने पर सरकार को सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए।
जीशान सिद्दीकी ने फडणवीस को लिखा पत्र
जीशान सिद्दीकी ने शनिवार को लिखे पत्र में कहा कि पिछले कुछ दिनों के दौरान मुंबई, पुणे और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में बड़ी संख्या में छात्रों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कई छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और उन्हें पुलिस की ओर से नोटिस भी जारी किए गए।
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उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से आग्रह किया कि अब जबकि छात्रों की मांगों पर कार्रवाई हो चुकी है, ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर विचार किया जाना चाहिए। सिद्दीकी ने कहा कि ये सभी युवा अपने जीवन और करियर की शुरुआती अवस्था में हैं और उनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबी अवधि तक बने रहने से उनकी शिक्षा, रोजगार और भविष्य की संभावनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
युवाओं को अपनी बात रखने का अधिकार है
पत्र में उन्होंने कहा कि सरकार यदि इन मामलों को वापस लेने का फैसला करती है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों, निष्पक्षता और सुलह की भावना को मजबूत करने वाला कदम होगा। उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र में युवाओं को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है और ऐसे छात्रों को स्थायी कानूनी परिणामों का सामना करने के बजाय आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
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जीशान सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने का अनुरोध करते हुए कहा कि एफआईआर वापस लेने का निर्णय सरकार की सकारात्मक और मानवीय सोच को दर्शाएगा। उनके अनुसार, इससे छात्रों और सरकार के बीच विश्वास भी मजबूत होगा और भविष्य में लोकतांत्रिक संवाद को बढ़ावा मिलेगा।
