

Devendra Fadnavis Political Journey: भारतीय जनता पार्टी के भीतर अक्सर यह कहा जाता है कि यहां एक साधारण कार्यकर्ता भी देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है, और महाराष्ट्र की राजनीति में इस बात का सबसे जीवंत उदाहरण देवेन्द्र फडणवीस हैं। नागपुर की गलियों में एक साधारण बूथ कार्यकर्ता के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले फडणवीस आज महाराष्ट्र के 21वें मुख्यमंत्री के रूप में तीसरी बार राज्य की कमान संभाल रहे हैं।
देवेन्द्र फडणवीस का जन्म 22 जुलाई 1970 को नागपुर के गंगाधर और सरिता फडणवीस के परिवार में हुआ था। राजनीति उन्हें विरासत में मिली थी। उनके पिता विधान परिषद के सदस्य थे और उनकी चाची शोभाताई फडणवीस पांच बार विधायक रह चुकी थीं।
हालांकि, उनकी असली वैचारिक नींव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में पड़ी, जहां उन्होंने समाज सेवा और राष्ट्र प्रथम की सीख ली। अपनी शिक्षा के दौरान ही वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए और यहीं से उनके नेतृत्व कौशल को धार मिली।
फडणवीस की राजनीतिक उड़ान बहुत छोटी उम्र में ही शुरू हो गई थी। 1992 में नागपुर विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री पूरी करने के दौरान ही वे कॉर्पोरेटर चुने गए। 1992 से 2001 तक वे नगरसेवक रहे, लेकिन उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मात्र 27 साल की उम्र में वे नागपुर के मेयर बने। वे नागपुर के इतिहास में सबसे कम उम्र के मेयर थे, जिसने राज्य स्तर के नेताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।
मेयर के रूप में सफलता के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1999 में वे पहली बार विधानसभा पहुंचे और तब से लेकर 2024 तक लगातार 25 वर्षों से वे विधायक बने हुए हैं। उनकी प्रखर वक्ता शैली और विधायी कार्यों की गहरी समझ ने उन्हें पार्टी में ऊंचाइयों पर पहुंचाया। 2013 में वे महाराष्ट्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने और 2014 के चुनावों में पार्टी को बड़ी जीत दिलाई।
2014 में उन्होंने पहली बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। शरद पवार के बाद वे राज्य के दूसरे सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। उनके नाम एक अनोखा रिकॉर्ड भी दर्ज है, एक ही कार्यकाल (2019-2024) के भीतर उन्होंने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और विधानसभा में विपक्ष के नेता, तीनों महत्वपूर्ण भूमिकए निभाईं।
देवेन्द्र फडणवीस केवल एक कुशल राजनेता ही नहीं, बल्कि एक लेखक और विचारक भी हैं। उन्होंने बजट को आसानी से कैसे समझें जैसी किताबें लिखी हैं। उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई सम्मान मिले हैं, जिनमें ओसाका सिटी यूनिवर्सिटी, जापान द्वारा मानद डॉक्टरेट और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी, यूएसए द्वारा उत्कृष्ट नेतृत्व पुरस्कार शामिल हैं।
आज 54 वर्ष की आयु में वे तीसरी बार राज्य का नेतृत्व कर रहे हैं। एक वार्ड के बूथ कार्यकर्ता से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री तक का उनका यह सफर यह साबित करता है कि चातुर्य, समर्पण और कड़ी मेहनत से सफलता के किसी भी शिखर को छुआ जा सकता है।