यवतमाल न्यूज
Summer Action Plan 2026: यवतमाल जिले में गर्मी की तीव्रता बढ़ने की संभावना को देखते हुए जिला परिषद प्रशासन ने संभावित पेयजल संकट से निपटने के लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। जिला परिषद के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने इस वर्ष गर्मियों में पानी की कमी की स्थिति से निपटने के लिए करीब 15 करोड़ रुपये का प्रारूप तैयार किया है।
इस योजना के तहत आवश्यकता पड़ने पर जिले में 91 टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति करने तथा 650 कुओं का अधिग्रहण करने की तैयारी की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में हर साल गर्मियों के दिनों में जलस्तर तेजी से नीचे चला जाता है, जिससे कई गांवों में पेयजल की समस्या गंभीर हो जाती है।
इस संभावित संकट को देखते हुए जिला परिषद प्रशासन ने पहले से ही विस्तृत योजना बनाकर आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत जलापूर्ति की व्यवस्था की जा सके। प्रशासन के अनुसार जिले की पुसद, आर्णी, दारव्हा और दिग्रस तहसीलों में हर साल गर्मियों के दौरान पानी की कमी अधिक महसूस की जाती है।
कई गांवों में कुएं और हैंडपंप सूख जाते हैं या जलस्तर काफी नीचे चला जाता है। इसलिए इस वर्ष इन तहसीलों पर विशेष फोकस रखा गया है। अधिकारियों ने संभावित जलसंकट वाले गांवों की सूची तैयार करने के साथ ही वहां वैकल्पिक जलस्रोतों की भी पहचान की है।
गर्मी के दिनों में यदि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराता है तो प्रशासन द्वारा 91 टैंकरों की व्यवस्था कर गांवों में पानी पहुंचाया जाएगा। इसके लिए टैंकर संचालन, मार्ग निर्धारण और जलस्रोतों की पहचान का प्रारंभिक खाका भी तैयार कर लिया गया है। साथ ही जिन गांवों में आवश्यकता अधिक होगी, वहां प्राथमिकता के आधार पर टैंकरों की आपूर्ति की जाएगी।
टैंकरों के अलावा प्रशासन ने 650 निजी और सार्वजनिक कुओं का अधिग्रहण करने की भी योजना बनाई है, ताकि इन कुओं से पानी लेकर टैंकरों के माध्यम से गांवों तक पहुंचाया जा सके। इससे जलापूर्ति की प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने में मदद मिलेगी और संकटग्रस्त गांवों में पानी की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।
पिछले वर्ष जिले के सात से आठ तहसीलों में गर्मियों के दौरान पेयजल संकट गहराने के कारण प्रशासन को 39 टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति करनी पड़ी थी। कई गांवों में जलस्तर गिरने के कारण कुएं और हैंडपंप सूख गए थे, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इस अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष पहले से ही अधिक व्यापक योजना तैयार की गई है।
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अधिकारियों के अनुसार मार्च के बाद तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना है। यदि जलस्तर में गिरावट आती है तो अप्रैल महीने से कुछ गांवों में टैंकरों से जलापूर्ति शुरू करने की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पहले से ही टैंकर, जलस्रोत और संभावित गांवों का प्रारूप तैयार कर लिया है।
हालांकि वर्तमान समय में जिले में किसी भी गांव में टैंकर से जलापूर्ति शुरू नहीं की गई है। अधिकांश जलस्रोतों में अभी पर्याप्त पानी उपलब्ध है और स्थिति नियंत्रण में है। फिर भी जिला परिषद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और जैसे ही आवश्यकता महसूस होगी, तत्काल टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति शुरू की जाएगी।