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भीषण गर्मी का असर: भंडारा के कई तालाब सूखे, पेयजल और सिंचाई संकट गहराया

Drying Ponds Bhandara: तालाबों के लिए प्रसिद्ध भंडारा जिले में भीषण गर्मी के कारण जलसंकट गहराता जा रहा है। 44 डिग्री तापमान के चलते कई तालाब सूख चुके हैं, जिससे भूजल स्तर में गिरावट आई है।

  • Author By manoj choubey | published By महाराष्ट्र डेस्क |
Updated On: Jun 12, 2026 | 04:50 PM

Drying Ponds (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)

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Bhandara Water Crisis: भंडारा  जिले को तालाबों का जिला कहा जाता है, लेकिन इस वर्ष भीषण गर्मी के कारण जिले में गंभीर जलसंकट उत्पन्न हो गया है। गांवगांव में स्थित छोटेबड़े तालाब लगातार सूख रहे हैं और कई तालाब पूरी तरह जलविहीन हो चुके हैं। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के जलस्तर पर पड़ा है।

वहीं, पारंपरिक मत्स्य व्यवसाय प्रभावित होने से भोई समुदाय के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। भंडारा जिले में वर्षा ऋतु के दौरान तालाबों में बड़ी मात्रा में पानी जमा होता है। यही पानी पूरे वर्ष खेती की सिंचाई तथा पशुओं के पेयजल की जरूरतों को पूरा करता है। इसके अलावा, तालाबों से होने वाले जल रिसाव के कारण भूजल स्तर बना रहता है, जिससे गांवों की बोरवेल और कुओं में पानी उपलब्ध रहता है।

44 डिग्री तापमान ने बढ़ाई मुश्किलें

हालांकि, इस वर्ष तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के कारण तालाबों का पानी तेजी से वाष्पित हो गया। परिणामस्वरूप अधिकांश तालाबों का जलस्तर घट गया है और कई पूरी तरह सूख चुके हैं। तालाबों के सूखने से भूजल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है, जिसके चलते अनेक गांवों में अभी से पेयजल संकट गहराने लगा है।

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सूख रहे जलाशय और बढ़ी चिंता

इस जलसंकट का सबसे अधिक असर स्थानीय ढीमर समुदाय पर पड़ा है। हर वर्ष बारिश की शुरुआत में तालाबों में मत्स्य बीज छोड़े जाते हैं और पूरे वर्ष उनकी देखभाल की जाती है। आजिविका चलाते सैकड़ों परिवार गर्मियों में बड़ी मात्रा में मछलियों का उत्पादन होने पर उन्हें बाजार में बेचकर सैकड़ों परिवार अपनी आजीविका चलाते हैं।

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भूजल स्तर गिरने से गांवों में बढ़ा जलसंकट

लेकिन इस बार तालाबों के सूख जाने से न केवल मत्स्य उत्पादन प्रभावित हुआ है, बल्कि किसानों के सामने सिंचाई का संकट भी गंभीर रूप धारण कर चुका है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते जलसंरक्षण और जलस्रोतों के पुनर्भरण के लिए प्रभावी उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में जिले में पेयजल और सिंचाई दोनों की समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है।

Bhandara water crisis drying ponds fishermen livelihood impact

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Published On: Jun 12, 2026 | 04:11 PM

Topics:  

  • Bhandara News
  • Maharashtra News
  • Water Crisis

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