
भाजपा नगरसेवक ने की शिकायत (सौजन्य-नवभारत)
BJP Mahesh Kaleshwarkar: उमरखेड़ नगर परिषद की अब्दुल गफूर शाह उर्दू स्कूल क्रमांक 2 में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। यह कार्यक्रम 31 जनवरी को हुआ, जिसमें विद्यार्थियों से एक देश-विरोधी गीत पर गायन और नृत्य करवाए जाने का आरोप सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के जिला महासचिव महेश कालेश्वरकर ने 4 फरवरी को विश्रामगृह में आयोजित पत्रकार परिषद में उक्त शिक्षक पर मामला दर्ज करने की मांग की।
कार्यक्रम में ”ऐ मर्द-ए-मुजाहिद तेरी यलगार कहां है” यह पाकिस्तानी गीत चलाया गया। भाजपा पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि यह गीत भारत में प्रतिबंधित गीतों की सूची में शामिल है। इस गीत में “तलवार कहाँ है?” जैसे वाक्य प्रयोग कर लोगों को भड़काने और उग्र कार्रवाई के लिए प्रेरित किया जाता है।
यह गीत 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय पाकिस्तान में काफी प्रसिद्ध था और आज भी वहां सैन्य तथा राष्ट्रीय कार्यक्रमों में बजाया जाता है। कालेश्वरकर ने कहा कि मासूम बच्चों से ऐसा देश-विरोधी गीत गवाकर या उस पर नृत्य करवाना मुख्याध्यापक और शिक्षकों का देशविरोधी कार्य है।
यह संविधान के अनुच्छेद 28 के भी खिलाफ है, जिसमें सरकारी स्कूलों में धार्मिक प्रकार के गीत/कार्यक्रमों पर प्रतिबंध है। उन्होंने कहा कि ऐसे गीत बच्चों के कोमल मन पर भारत-विरोधी विचार थोपने का कार्य करते हैं तथा सामाजिक और धार्मिक तनाव बढ़ाने की साजिश प्रतीत होती है।
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कार्यक्रम स्थल पर नगर परिषद के पदाधिकारी, नगराध्यक्ष, शिक्षण सभापति और नगरसेवक उपस्थित थे, लेकिन गीत शुरू होने पर भी किसी ने इसे रोकने का प्रयास नहीं किया, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से इसे समर्थन ही मिला। पत्रकार परिषद में भाजपा के गटनेता विजय हरडपकर, शहर अध्यक्ष अतुल खंदारे, नगरसेवक अमोल तीवरंगकर, गोपाल कलाने, पवन मेंढे और बबलू मैड उपस्थित थे।
भाजपा नगरसेवक गोपाल कलाने ने 2 फरवरी को पुलिस को दी गई शिकायत में मांग की कि इस प्रकरण की तुरंत और विस्तृत जांच की जाए तथा दोषी शिक्षक, स्कूल प्रशासन, नगराध्यक्ष और शिक्षण सभापति पर भारतीय न्याय संहिता के अनुसार फौजदारी मामला दर्ज किया जाए।
भाजपा पदाधिकारियों ने कहा कि दोषियों पर कार्रवाई होने तक वे शांत नहीं बैठेंगे। “सरकारी उर्दू स्कूल में अगर इस तरह का ‘शिक्षण’ दिया जा रहा है तो इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी ही चाहिए”, ऐसा कालेश्वरकर ने कहा।






