यवतमाल: विधान परिषद चुनाव पर कांग्रेस का हमला, सचिन नाईक बोले- लोकतांत्रिक मूल्यों का हुआ हनन
MLC Election Controversy: यवतमाल विधान परिषद चुनाव में पालकमंत्री पर धनबल के दुरुपयोग और उम्मीदवारों पर नामांकन वापस लेने का दबाव बनाकर लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने का आरोप है।
- Written By: केतकी मोडक
कांग्रेस जिलाध्यक्ष एड. सचिन नाईक पत्रकार परिषद में (सोर्स - नवभारत)
Yavatmal MLC Election Controversy: स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र के माध्यम से होने वाली विधान परिषद चुनाव प्रक्रिया में यवतमाल के पालकमंत्री के कथित सीधे हस्तक्षेप और तानाशाही रवैये के कारण लोकतांत्रिक मूल्यों का सरेआम हनन हुआ है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि इस पूरी प्रक्रिया में मतदाताओं के साथ घोर अन्याय किया गया है।
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष एड. सचिन नाईक ने बेहद गंभीर दावा करते हुए कहा कि इस विधान परिषद चुनाव में महाविकास अघाड़ी और कांग्रेस सहित अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों पर उनका नामांकन जबरन वापस लेने के लिए भारी प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव बनाया गया।
सोमवार को स्थानीय विश्रामगृह में आयोजित एक गर्मागर्म पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए नाईक ने कहा कि इस चुनाव प्रक्रिया के दौरान जो शर्मनाक घटनाक्रम सामने आया है, वह भारतीय लोकतंत्र के भविष्य के लिए बेहद घातक और चिंताजनक है।
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सत्ता और धनबल का खुलकर हुआ नंगा नाच
एड. सचिन नाईक ने सत्ताधारी दल को आड़े हाथों लेते हुए सीधा आरोप लगाया कि इस पूरी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए सरकारी तंत्र, सत्ता और अकूत धनबल का खुलकर दुरुपयोग किया गया। इसके चलते हमारी मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि डरा-धमकाकर उम्मीदवारों के नाम वापस करवा लिए गए, जिससे स्थानीय मतदाताओं और जनप्रतिनिधियों के सामने से चुनाव का विकल्प ही पूरी तरह समाप्त हो गया।
नतीजतन, मतदाताओं को अपने मनपसंद प्रतिनिधि का चयन करने के बुनियादी संवैधानिक अधिकार से पूरी तरह वंचित होना पड़ा है। नाईक ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि सत्ताधारी दल का यह अहंकार और घमंड लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आने वाले दिनों में भारी नुकसानदायक साबित होगा।
निष्पक्ष जांच के लिए चुनाव आयोग का खटखटाया दरवाजा
इस पूरे सुनियोजित राजनीतिक घटनाक्रम पर केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि जिले के कई मौजूदा नगरसेवकों ने भी गहरी नाराजगी और आक्रोश व्यक्त किया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष एड. सचिन नाईक ने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं, पीड़ित उम्मीदवारों और जागरूक मतदाताओं ने संयुक्त रूप से केंद्रीय चुनाव आयोग से लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच की जाए और लोकतंत्र का गला घोंटने वाले जिम्मेदार राजनेताओं व अधिकारियों के खिलाफ तत्काल उचित दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए।
स्थानीय नेतृत्व की उपेक्षा कर ‘बाहरी’ को टिकट देने पर भड़का गुस्सा
पत्रकार परिषद में विपक्षी नेताओं ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दे पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि यवतमाल जिले के स्थानीय ज्वलंत मुद्दों, यहां की मिट्टी और राजनीति से दूर-दूर तक कोई सीधा संबंध नहीं रखने वाले एक ‘बाहरी’ व्यक्ति को सत्ता पक्ष द्वारा उम्मीदवार बना दिया गया। स्थानीय सक्षम नेतृत्व की इस तरह सरेआम उपेक्षा करना और किसी बाहरी पैराशूट उम्मीदवार को थोपना यवतमाल के मतदाताओं की भावनाओं और उनके स्वाभिमान का सीधा अपमान है।
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एड. सचिन नाईक ने सत्ताधारियों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता पक्ष की इस दमनकारी भूमिका के खिलाफ जनता की आवाज को बुलंद करने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए यवतमाल का पूरा विपक्ष अब एकजुट हो चुका है।
आने वाले दिनों में इस तानाशाही के खिलाफ और अधिक मजबूत, आक्रामक तथा निर्णायक भूमिका निभाई जाएगी। इस महत्वपूर्ण और प्रेस वार्ता के अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आरिज बैग, संजय ठाकरे सहित जिले के अन्य प्रमुख पदाधिकारी और भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।
