(प्रतीकात्मक तस्वीर)
Yavatmal Gram Panchayat News: पिछले तीन साल से यवतमाल जिले के सभी शहरों ने प्रशासक शासन देखा है। अब नगरपालिकाओं के चुनाव हो चुके हैं और निर्वाचित पदाधिकारी सत्ता में आ गए हैं। लेकिन अब जिले के ग्रामीण प्रशासन का प्रभार प्रशासकों के हाथों में जाने वाला है। जिले में वर्ष 2026 में कुल 980 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है और अब सरकार के ग्राम विकास विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार यहां प्रशासक राज आना तय है।
ग्रामीण विकास विभाग ने इन ग्राम पंचायतों पर प्रशासक नियुक्त करने के आदेश जारी किए हैं। यहां प्रशासक की जिम्मेदारी संभालने के स्तर के अधिकारियों की किल्लत हो गई है। इसलिए जिला परिषद की स्कूलों के शिक्षकों को फिर से ग्राम पंचायतों के प्रशासक बनाने की संभावना बन रही है। छह साल पहले इसी तरह जिला परिषद के स्कूलों में वरिष्ठ शिक्षक और मुख्याध्यापक को ग्राम पंचायत प्रशासक नियुक्त किया गया था, जिसकी संख्या 500 से अधिक थी। इस बार भी ऐसी ही स्थिति उत्पन्न होने की संभावना है।
यवतमाल जिले की 980 ग्राम पंचायतों के पदाधिकारियों का कार्यकाल फरवरी में समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही पिछले दो वर्षों में लगभग 50 नई बस्तियों को ग्राम पंचायत का दर्जा दिया गया है। इन एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के चुनाव कराना अब जरूरी है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अभी तक चुनाव की कोई तैयारी नहीं हुई है।
इसके विपरीत ग्रामीण विकास विभाग ने 23 जनवरी को आदेश जारी किया कि जनवरी 2026 से दिसंबर 2026 के बीच कार्यकाल समाप्त होने वाली ग्राम पंचायतों पर प्रशासक नियुक्त किया जाए, लेकिन जिले में इतनी बड़ी संख्या में प्रशासकों को नियुक्त करने के लिए पंचायत समितियों स्तर पर पर्याप्त विस्तार अधिकारी या समकक्ष कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए जिला परिषद स्तर पर संबंधित गांव के शिक्षक या मुख्याध्यापक को ग्राम पंचायत का प्रशासक नियुक्त किए जाने की संभावना है।
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कार्यकाल समाप्त हो चुकी ग्राम पंचायतों में चुनाव कराने की कोई तैयारी नजर नहीं आ रही। वहीं 23 जनवरी को राज्य ग्रामीण विकास विभाग ने 14 अगस्त 2020 के शासन निर्णय के अनुसार इन ग्राम पंचायतों पर प्रशासक नियुक्त करने के आदेश जारी किए हैं। लेकिन कुछ कर्मचारियों को प्रशासक नियुक्त करने के बजाय, संबंधित ग्राम पंचायत के वर्तमान सरपंच को ही प्रशासक बनाए जाने की मांग सरपंच संगठन से उठ रही है।
2020 में जिले के सैकड़ों शिक्षकों और मुख्याध्यापकों को ग्राम पंचायत प्रशासक नियुक्त किया गया था, लेकिन उनका वेतन बहुत देर से दिया गया। इसलिए इस बार शिक्षक इस जिम्मेदारी को लेने को उत्साहित नहीं दिख रहे हैं। इसके अलावा टीईटी, संच मान्यता, छात्र संख्या के आधार, केंद्रीय मुख्य परीक्षा जैसी कई जिम्मेदारियों के कारण शिक्षक पहले से ही व्यस्त हैं। ऐसे में ग्राम पंचायत की बढ़ी हुई और संवेदनशील जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं है।