शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Shaina NC Ganesh Naik Row: महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन के भीतर दरारें अब सार्वजनिक मंचों पर दिखने लगी हैं। भाजपा नेता गणेश नाईक द्वारा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ दिए गए ‘मिटा देने’ वाले बयान पर शिवसेना नेता शायना एनसी ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने नाईक की मर्यादा पर सवाल उठाते हुए उन्हें जमीनी हकीकत याद दिलाई है।
महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब कद्दावर नेता गणेश नाईक ने एक सार्वजनिक मंच से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सीधे तौर पर निशाने पर लिया। नाईक ने दावा किया कि यदि भाजपा नेतृत्व उन्हें अनुमति दे, तो वह एकनाथ शिंदे को राजनीतिक रूप से समाप्त कर सकते हैं। नाईक का यह बयान केवल व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि महायुति गठबंधन के भीतर पनप रहे असंतोष का सीधा संकेत माना जा रहा है। उन्होंने ठाणे और कल्याण जैसे क्षेत्रों में सीट बंटवारे को लेकर भी भाजपा की स्थिति को कमजोर बताया, जिससे शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं में भारी रोष है।
इस अपमानजनक टिप्पणी का जवाब देते हुए शिवसेना की फायरब्रांड नेता शायना एनसी ने गणेश नाईक को आइना दिखाया। शायना ने सवाल किया कि क्या नाईक ने यह बयान देने से पहले अपनी पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं से अनुमति ली थी? उन्होंने स्पष्ट किया कि एकनाथ शिंदे कोई ‘पैराशूट’ नेता नहीं हैं, बल्कि वे जमीन से उठकर शिखर तक पहुंचे हैं।
शायना ने कहा, “एकनाथ शिंदे को किसी के सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है। वे जनता के नेता हैं और उन्हें जनसमर्थन प्राप्त है। ऐसे बयान देने वाले नेताओं की मानसिकता उनकी अपनी असुरक्षा को दर्शाती है।” उन्होंने नाईक को याद दिलाया कि उनकी वर्तमान राजनीतिक स्थिति में शिंदे सरकार का भी योगदान रहा है, अतः उन्हें अपनी मर्यादा नहीं भूलनी चाहिए।
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गणेश नाईक की नाराजगी के पीछे आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और मेयर पद के समीकरणों को माना जा रहा है। नाईक का तर्क था कि अगर भाजपा ने ठाणे, उल्हासनगर और कल्याण में अकेले चुनाव लड़ा होता, तो परिणाम और भी बेहतर होते। हालांकि, शायना एनसी ने इसे गठबंधन विरोधी मानसिकता करार दिया। उन्होंने नसीहत दी कि राजनीति में कुछ बातें सार्वजनिक रूप से कहने के बजाय निजी दायरे में रखना ही समझदारी होती है।
विवाद केवल शिंदे तक सीमित नहीं रहा। शायना एनसी ने पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण दिए जाने पर उद्धव गुट के विरोध का भी जवाब दिया। उन्होंने कोश्यारी के आरएसएस प्रचारक से लेकर मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक के सफर का जिक्र करते हुए उनके राष्ट्रवाद की सराहना की। शायना ने कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्षी खेमे में शायद पद्म पुरस्कार के योग्य कद का कोई नेता नहीं बचा है, इसलिए वे दूसरों के सम्मान पर राजनीति कर रहे हैं।